36 दिन का उबाल, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और अब परीक्षा तंत्र को बदलने आ गए ये 6 धुरंधर
देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और पेपर लीक को लेकर छात्रों में पनपे आक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली बनाने के लिए एक उच्च-स्तरीय कार्य बल (High-Level Task Force) के गठन का ऐलान किया है। इस विशेष समिति की कमान टेक जगत के दिग्गज और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकानी को सौंपी गई है।
यह बड़ा फैसला 36 दिनों से चले आ रहे बड़े छात्र आंदोलन के समाप्त होने के ठीक अगले दिन आया है, जिसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था। सरकार का मुख्य मकसद भारत के परीक्षा तंत्र से खामियों को हमेशा के लिए खत्म करना है।
नंदन नीलेकानी के साथ टास्क फोर्स में शामिल हैं ये 6 बड़े दिग्गज
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नंदन नीलेकानी (अध्यक्ष): इंफोसिस के सह-संस्थापक एवं गैर-कार्यकारी अध्यक्ष, UIDAI (आधार) के पूर्व अध्यक्ष।
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डॉ. एस. सोमनाथ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष।
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तपन डेका: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक।
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प्रो. वी. कामकोटि: आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के निदेशक।
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अनीता कारवाल: भारत सरकार की पूर्व शिक्षा सचिव।
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अमृत लाल मीना: लॉजिस्टिक्स एवं लोक प्रशासन विशेषज्ञ।
जानिए कौन हैं नंदन नीलेकानी?
नंदन नीलेकानी भारत के टेक सेक्टर के सबसे विश्वसनीय और प्रतिष्ठित चेहरों में से एक हैं। वर्ष 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इंफोसिस (Infosys) की स्थापना की थी। 2002 से 2007 तक कंपनी के सीईओ के रूप में सेवाएं देने के बाद, वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निमंत्रण पर उन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष का पद संभाला और देश को 'आधार कार्ड' जैसा डिजिटल ढांचा दिया। 2017 में वह दोबारा इंफोसिस लौटे और वर्तमान में इसके नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं।
क्या काम करेगी यह नई टास्क फोर्स?
नीलेकानी नीत यह पैनल आगामी नेशनल लेवल की परीक्षाओं को सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक सिफारिशें सौंपेगा। समिति का प्राथमिक उद्देश्य उन्नत तकनीकों (Advanced AI and Tech Solutions) का अधिकतम इस्तेमाल करके एक ऐसा डिजिटल और भौतिक परीक्षा ढांचा तैयार करना है, जिसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। सरकार इन सिफारिशों को लागू कर छात्रों के बीच भारत की परीक्षा प्रणालियों के प्रति खोए विश्वास को वापस बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।