भारत की एयर पावर में बड़ा गेमचेंजर, 300 KM दूर बैठे टारगेट पर होगा एक झटके में वार

भारत की एयर पावर में बड़ा गेमचेंजर, 300 KM दूर बैठे टारगेट पर होगा एक झटके में वार

भारतीय वायुसेना के सबसे प्रमुख लड़ाकू विमान बेड़े सुखोई-30MKI (Su-30MKI) की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा करने की तैयारी चल रही है। रक्षा मंत्रालय रूसी मूल की अत्याधुनिक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल RVV-BD (आर-37एम का निर्यात संस्करण) को सुखोई विमानों के साथ एकीकृत करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

ये मिसाइल हवा से हवा में करीब 300 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के किसी भी हवाई लक्ष्य को अचूक सटीकता से तबाह करने की क्षमता रखती है। सुखोई बेड़े में इसके शामिल होते ही भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी के हवाई युद्ध में अभूतपूर्व बढ़त हासिल होगी।

6 मैक की हाइपरसोनिक गति और हाई-वैल्यू टारगेट्स पर निशाना

RVV-BD मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक तीव्र गति है, जिसके अलग-अलग संस्करण करीब 6 मैक (ध्वनि की गति से छह गुना तेज) तक की रफ्तार पकड़ने में सक्षम हैं। इतनी विध्वंसक गति और 300 किलोमीटर की विशाल रेंज के चलते दुश्मन के लड़ाकू विमानों, रिफ्यूलिंग टैंकरों और विशेष रूप से हवा से निगरानी करने वाले एडवांस्ड वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी अवाक्स (AWACS) विमानों के लिए इससे बच पाना नामुमकिन जैसा हो जाता है। यह मिसाइल दुश्मन के वायु रक्षा दायरे में घुसे बिना ही उसके सामरिक विमानों को दूर से मार गिराने की क्षमता प्रदान करती है।

स्वदेशी 'अस्त्र' और फ्रेंच 'मिटिओर' के साथ बनेगा अचूक सुरक्षा घेरा

हवाई युद्ध क्षमता को अजेय बनाने के लिए भारत स्वदेशी और विदेशी दोनों तरह की अत्याधुनिक मिसाइल तकनीकों के संतुलन पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्वदेशी 'अस्त्र' (Astra) बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल के उन्नत और लंबी दूरी वाले संस्करणों को तेजी से विकसित कर रहा है, वहीं राफेल विमानों में तैनात फ्रांसीसी 'मिटिओर' (Meteor) मिसाइल पहले से ही वायुसेना की अग्रिम ताकत बनी हुई है। अब सुखोई में RVV-BD के एकीकरण से भारतीय वायुसेना का तीनों तरह की लंबी दूरी की मिसाइलों का त्रिशूल तैयार हो जाएगा।

260 से अधिक सुखोई विमानों का व्यापक आधुनिकीकरण

भारतीय वायुसेना के अग्रिम मोर्चे पर 260 से ज्यादा Su-30MKI लड़ाकू विमान तैनात हैं। इस पूरे बेड़े को भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों के अनुकूल ढालने के लिए कई बड़े अपग्रेड प्रोजेक्ट समानांतर रूप से चलाए जा रहे हैं।

इनमें नए जमाने के स्वदेशी एवियोनिक्स, उत्तम रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सुइट, आधुनिक हथियार प्रणालियां और AL-31FP इंजनों के स्वदेशी ओवरहॉलिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन तकनीकों के जुड़ने से सुखोई-30MKI विमान आधुनिक दौर के पांचवीं पीढ़ी के विमानों की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे।