विपक्ष में थे तब क्या करते थे; सत्ता पक्ष पर भड़के अभिजीत दीपके, खोल दिया पुराना कच्चा-चिट्ठा

विपक्ष में थे तब क्या करते थे; सत्ता पक्ष पर भड़के अभिजीत दीपके, खोल दिया पुराना कच्चा-चिट्ठा

राजधानी दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में शुक्रवार शाम आयोजित होने वाले प्रदर्शन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। स्थानीय व्यापारियों द्वारा कारोबार प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान की शिकायत पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कड़ा रुख अपनाया है। दुकानदारों के नुकसान पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने साफ कहा कि कारोबारियों की बर्बादी की वजह शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं, बल्कि सरकार द्वारा शहर में लगाई गई सख्त पाबंदियां, इंटरनेट बंदी और आवाजाही पर रोक है, जिसने आम शहरी माहौल को छावनी जैसा बना दिया है।

पार्टी के ट्रैक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी का आधार महात्मा गांधी का अहिंसा और शांति का रास्ता है। उन्होंने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में हुए पिछले आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी जगह उनके कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे। जयपुर में खुद पर हुए हमले की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि शारीरिक हिंसा का जवाब हिंसा से देने के बजाय उन्होंने डॉक्टर बीआर अंबेडकर के बनाए संविधान के दायरे में रहकर अधिकारों की लड़ाई को तरजीह दी है।

दीपके ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष से सवाल पूछना या अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना अराजकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बुनियादी ताकत है। मौजूदा सत्ताधारी दल पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज सत्ता में बैठकर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहे हैं, वे खुद दशकों तक विपक्ष में रहकर इन्हीं लोकतांत्रिक अधिकारों के सहारे आगे बढ़े हैं। सत्ता में आते ही विरोध को दबाना सरासर राजनीतिक पाखंड है।

दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस में छोटे समूह को तिरंगा फहराने की इजाजत दे दी है, हालांकि एहतियात के तौर पर सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए पूरी तरह बंद रखा गया है। यह तनातनी ऐसे समय में बढ़ी है जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर किए जाने के बाद वहां तिरंगा फहराने और नारेबाजी करने के आरोप में सीजेपी के दो प्रमुख नेताओं, सौरभ दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में लिया था। दीपके का कहना है कि पार्टी कोई विशेषाधिकार नहीं मांग रही, बल्कि संविधान में हर भारतीय नागरिक को मिले अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण एकत्र होने के बुनियादी अधिकार का प्रयोग कर रही है।