पेट्रोल के बाद अब चीनी पर महंगाई की मार! खुदरा बाजार में दाम पहुंचे 50-60 रुपये के पार

पेट्रोल के बाद अब चीनी पर महंगाई की मार! खुदरा बाजार में दाम पहुंचे 50-60 रुपये के पार

देश में पेट्रोल के बाद अब चीनी की खुदरा कीमतों में लगातार तेज उछाल देखा जा रहा है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। वर्तमान में देश के कई हिस्सों में खुदरा बाजार में चीनी के दाम 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं।

आगामी त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग में भारी बढ़ोतरी की संभावना है, जिसके कारण इसके दामों में और अधिक इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में चीनी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने की योजना बना रही है। इसके तहत आगामी अक्टूबर से शुरू होने वाले पेराई सत्र में इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की मात्रा को सीमित किया जा सकता है।

कम बारिश के कारण उत्पादन घटने की आशंका

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से यह अहम कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि भविष्य में देश के अंदर चीनी की किसी भी प्रकार की किल्लत न हो और इसके दाम आम जनता की क्रय शक्ति के दायरे में बने रहें। देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार कम बारिश होने के कारण अगले साल चीनी के कुल उत्पादन में गिरावट आने की पूरी आशंका है। इसी संभावित संकट से निपटने के लिए सरकार ने चीनी की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, जिससे भारत को भविष्य में चीनी के आयात पर निर्भर न रहना पड़े।

चीनी की कीमतों में 10 प्रतिशत तक का बड़ा इजाफा

मौजूदा पेराई सत्र के दौरान देश की चीनी मिलों ने अपने कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत यानी करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल केवल इथेनॉल बनाने के लिए किया था। आगामी सीजन में इस प्रक्रिया पर आंशिक पाबंदी लगाने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता में सीधे तौर पर उतना ही इजाफा हो जाएगा। इससे कम बारिश के कारण उत्पादन में होने वाली कमी की आसानी से भरपाई की जा सकेगी। पिछले एक महीने के भीतर ही देश में चीनी की कीमतों में 10 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है, और आने वाले त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

मक्के और चावल से की जाएगी इथेनॉल की भरपाई

चीनी के खुदरा दामों पर लगाम कसने के साथ-साथ केंद्र सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य को भी प्रभावित नहीं होने देना चाहती है। इस संतुलन को बनाए रखने के लिए गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की आपूर्ति की भरपाई अब मक्के और चावल के जरिए की जाएगी। देश में मक्के, चावल और अन्य खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार की नई रणनीति के तहत चीनी मिलों को गन्ने के रस और बी-हेवी मोलासेस से इथेनॉल बनाने से रोका जा सकता है और उन्हें मुख्य रूप से सी-हेवी मोलासेस का उपयोग करने की ही अनुमति दी जाएगी, जिससे चीनी का अधिकांश हिस्सा सुरक्षित रखा जा सके। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जल्द ही इथेनॉल खरीद के लिए नए टेंडर भी जारी किए जा सकते हैं।

शुगर इंडस्ट्री के कारोबार पर नहीं पड़ेगा बुरा असर

बढ़ती कीमतों और जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है और व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक निश्चित सीमा भी तय कर दी है। चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने से इथेनॉल बनाने पर रोक लगाने से चीनी मिलों के व्यावसायिक मुनाफे पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। वर्तमान में खुले बाजार में चीनी की मांग और कीमतें दोनों काफी मजबूत हैं, जिसके चलते मिलों को इथेनॉल के मुकाबले सीधे चीनी का उत्पादन और बिक्री करने में अधिक वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।