NEET विवाद के बीच प्रल्हाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान: जानें प्रधानमंत्री ने क्यों खेला ये बड़ा दांव

NEET विवाद के बीच प्रल्हाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान: जानें प्रधानमंत्री ने क्यों खेला ये बड़ा दांव

शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। NEET-UG परीक्षा को लेकर देश भर में जारी भारी विरोध और विवाद के बीच मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद, केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार अपने सबसे भरोसेमंद और अनुभवी कैबिनेट मंत्रियों में से एक, प्रल्हाद जोशी को सौंप दिया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर इस नए प्रभार को अपनी मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश का शिक्षा विभाग अपने अब तक के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।

मोदी सरकार का संकट प्रबंधन: उपभोक्ता मामलों के साथ संभालेंगे शिक्षा विभाग

प्रल्हाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय जैसा बेहद महत्वपूर्ण प्रभार मिलने के बाद उनका राजनीतिक कद और जिम्मेदारी दोनों काफी बढ़ गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि सरकार का यह फैसला किसी राजनीतिक फेरबदल के बजाय प्रशासनिक मजबूती और संकट प्रबंधन की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर जो अटूट विश्वास जताया है, वे उस पर पूरी तरह से खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि वे पूरी विनम्रता, ईमानदारी और लगन के साथ इस नए दायित्व को संभालेंगे और देश के छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

आखिर प्रल्हाद जोशी ही क्यों? जानिए PM मोदी के इस भरोसे की असली वजह

जब शिक्षा मंत्रालय विवादों के घेरे में हो, तब प्रल्हाद जोशी को ही यह कमान क्यों सौंपी गई? इसका जवाब उनके पिछले रिकॉर्ड में छिपा है। वर्ष 2019 से 2024 के दौरान संसदीय कार्य मंत्री के रूप में प्रल्हाद जोशी ने संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के कड़े हमलों के बीच सरकार की नीति और रणनीति का कुशलता से संचालन किया था। उनकी छवि एक सख्त प्रशासक, कुशल रणनीतिकार और कठिन समय में बेहतर समन्वय स्थापित करने वाले नेता की रही है।

विवादित और संवेदनशील परिस्थितियों में भी प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की उनकी इसी क्षमता के कारण प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में उन पर दांव खेला है।

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