37 दिन का दंगल खत्म होते ही जंतर-मंतर पर चला एनडीएमसी का हंटर! रातों-रात गायब हुआ टन-टन कचरा

37 दिन का दंगल खत्म होते ही जंतर-मंतर पर चला एनडीएमसी का हंटर! रातों-रात गायब हुआ टन-टन कचरा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ऐतिहासिक आंदोलन के समाप्त होते ही नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। शनिवार शाम जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर खाली किया, नगर निगम ने इस पूरे इलाके को चमकाने के लिए एक विशाल और व्यापक सफाई अभियान शुरू कर दिया। केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और अन्य प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद यह विरोध स्थल खाली हुआ है।

अब एनडीएमसी का एकमात्र मकसद इस ऐतिहासिक स्थल और आसपास के इलाकों को उसकी पुरानी रंगत और मूल स्थिति में वापस लौटाना है।

चौबीसों घंटे चल रहा है काम: 500 से अधिक सफाई कर्मचारी मैदान में

जंतर-मंतर और उसके आसपास की स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए NDMC ने 500 से अधिक सफाई कर्मचारियों की एक बड़ी फौज मैदान में उतार दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सफाई कर्मियों को अलग-अलग शिफ्टों में तैनात किया गया है ताकि चौबीसों घंटे बिना रुके काम जारी रह सके। आंदोलन के दौरान छोड़े गए टेंट, बैनर, निर्माण मलबा और खाद्य सामग्री के कचरे को तेजी से साफ किया जा रहा है।

हैवी ट्रकों और आधुनिक 'गोबलर मशीनों' का इस्तेमाल

सफाई अभियान को गति देने और भारी मलबे को हटाने के लिए एनडीएमसी ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है।

  • मशीनीकृत उपकरण: कचरा उठाने के लिए गोबलर मशीनों और ऑटो-टिपर्स को सेवा में लगाया गया है।

  • सिविल टीम की तैनाती: पत्थरों और पक्के निर्माण अपशिष्ट को हटाने के लिए सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया गया है।

  • प्रमुख सड़कों पर फोकस: सफाई का यह दायरा सिर्फ जंतर-मंतर रोड तक सीमित नहीं है, बल्कि टॉल्स्टॉय मार्ग, जय सिंह रोड, संसद मार्ग और कनॉट प्लेस के उन हिस्सों तक फैला है, जहां प्रदर्शन के दौरान भारी भीड़ जमा होती थी।

दो दिनों में हटाया गया दसियों टन कचरा

एनडीएमसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दिनों के भीतर विरोध स्थल से दसियों टन मिश्रित कचरा उठाया जा चुका है। 37 दिनों तक चले लंबे आंदोलन के कारण कचरे का अंबार लग गया था, जिसे निपटाने के लिए नगर निगम को विशेष रणनीति बनानी पड़ी। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जंतर-मंतर का कोना-कोना चमक नहीं जाता, तब तक यह अभियान इसी रफ्तार से जारी रहेगा।

जानिए क्यों और कैसे खत्म हुआ CJP का यह बड़ा आंदोलन?

दिल्ली का जंतर-मंतर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से कथित परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग को लेकर गूंज रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले छात्र और युवा सड़कों पर डटे हुए थे।

आंदोलन तब अपने चरम पर पहुंचा जब केंद्र सरकार ने गतिरोध समाप्त करने के लिए प्रदर्शनकारियों की मुख्य शर्तें मान लीं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा और छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिखित आश्वासन के बाद सीजेपी ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया। इसके तुरंत बाद ही नगर निगम को जंतर-मंतर मार्ग को फिर से आम जनता के लिए बहाल करने का रास्ता साफ हो गया।

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