जंतर-मंतर हिंसा में बड़ा खुलासा: FRS तकनीक ने बेनकाब किए 2500 उपद्रवी, माहौल बिगाड़ने की रची गई थी बड़ी साजिश
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर हाल ही में हुई हिंसक झड़पों के बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस संवेदनशील इलाके में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले दंगाइयों और उपद्रवियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद डिजिटल और अभूतपूर्व कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच टीमों ने आधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) तकनीक का इस्तेमाल कर एक बड़ा खुलासा किया है, जिसने सुरक्षा अमले के भी होश उड़ा दिए हैं।
FRS तकनीक के रडार पर आए 2500 हुड़दंगी
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, जंतर-मंतर और उसके आसपास लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो फुटेज को जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर में डाला, तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए हिंसा में सीधे तौर पर शामिल और भीड़ को उकसाने वाले करीब 2500 संदिग्ध उपद्रवियों की सटीक पहचान कर ली गई है। इन सभी के चेहरे पुलिस के डेटाबेस और राष्ट्रीय सुरक्षा रिकॉर्ड से मैच हो गए हैं।
दिल्ली का माहौल बिगाड़ने की सोची-समझी साजिश!
जांच एजेंसियों के शुरुआती इनपुट्स से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह हिंसा अचानक भड़की कोई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रीय राजधानी का माहौल खराब करने की एक गहरी और सोची-समझी साजिश काम कर रही थी। पकड़े गए और चिह्नित किए गए कई उपद्रवियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। पुलिस इस बात की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि इन असामाजिक तत्वों को प्रदर्शन स्थल पर जुटाने के लिए भारी फंडिंग की गई थी या नहीं और इनका असली आका कौन है।
दिल्ली पुलिस का कड़ा एक्शन और गिरफ्तारियों का दौर शुरू
तकनीकी रूप से चेहरे साफ होने के बाद दिल्ली पुलिस ने इन 2500 दंगाइयों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू कर दी है। संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और कई मुख्य आरोपियों को हिरासत में भी लिया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन और लोकतांत्रिक विरोध की आड़ में सुनियोजित तरीके से पथराव, आगजनी और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी साजिश का जल्द ही भंडाफोड़ किया जाएगा।