'इस्तीफा नहीं तो बैठक बेकार': NEET विवाद पर केंद्र को अल्टीमेटम, धर्मेंद्र प्रधान पर अड़ी CJP

'इस्तीफा नहीं तो बैठक बेकार': NEET विवाद पर केंद्र को अल्टीमेटम, धर्मेंद्र प्रधान पर अड़ी CJP

देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और NEET पेपर लीक को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठकों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर गतिरोध और गहरा गया है। 25 जुलाई को सरकार के साथ होने वाली अहम वार्ता से ठीक पहले तिलचट्टा जनता पार्टी (CJP) ने सख्त तेवर अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तो ऐसी बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

2 घंटे चली मैराथन बैठक

परीक्षाओं में जारी अनियमितताओं का सर्वमान्य समाधान निकालने के लिए दिल्ली के विठ्ठलभाई पटेल हाउस में एक हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई। सीजेपी की मांग थी कि बातचीत किसी सरकारी आवास या मंत्रालय के बजाय किसी तटस्थ स्थान पर हो, जिसे स्वीकार करते हुए यह बैठक रखी गई।

इस वार्ता में सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ (PMO) राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया। वहीं, सीजेपी की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास और अन्य युवा प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच यह तीसरी औपचारिक वार्ता थी। इससे पहले 20 जुलाई को भी जेपी नड्डा के आवास पर दो दौर की बातचीत हो चुकी थी।

'शिक्षा मंत्री ही अंतिम जवाबदेह': NTA कार्रवाई पर उठे सवाल

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा 47 अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने के कदम पर सीजेपी प्रवक्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन का कहना है कि सिर्फ निचले अधिकारियों पर कार्रवाई करके सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती।

सीजेपी के मुख्य न्यायिक समिति के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि धांधली और पेपर लीक के बाद कई बेकसूर छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है। इन तमाम दुखद घटनाओं और परीक्षा प्रणाली की विफलता की सीधी और अंतिम नैतिक जवाबदेही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बनती है, इसलिए उन्हें अपने पद से तत्काल इस्तीफा देना ही होगा।

3 मांगें और 5 बड़े सुधार: सरकार को सौंपा गया मांगों का चार्टर

शुक्रवार को हुई दो घंटे लंबी बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मीडिया को बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष अपनी 3 मुख्य मांगें और भविष्य की परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए 5 बड़े सुधार सुझाव रखे हैं। नड्डा ने कहा कि सरकार के भीतर इन बिंदुओं पर गंभीर मंथन जारी है और जल्द ही दोबारा बैठक कर वार्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

आपको बता दें कि यह राजनीतिक हलचल उस वक्त तेज हुई है जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार से ठोस आश्वासन मिलने के बाद अपनी 26 दिनों से चली आ रही लंबी भूख हड़ताल समाप्त की है।

जब तक इस्तीफा नहीं, जंतर-मंतर पर डटे रहेंगे छात्र

जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है। छात्र संगठन ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद से इस्तीफा नहीं होता, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा।

संगठन की मुख्य मांगें:

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: NEET पेपर लीक की सीधी जिम्मेदारी तय करते हुए धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र।

  • मुआवजा: पेपर लीक व धांधली के तनाव में आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा।

  • केस वापसी: आंदोलन में शामिल निर्दोष और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR और कानूनी मुकदमे रद्द किए जाएं।

  • व्यापक सुधार: NTA की कार्यप्रणाली में बदलाव और परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून।

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