SC पर फूटा CJP का गुस्सा: CEC ज्ञानेश कुमार पर सुनवाई से पहले लगाए गंभीर आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीकों और उन्हें निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। ठीक इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शीर्ष अदालत की भूमिका पर सीधे सवाल दागते हुए माहौल गरमा दिया है। पार्टी नेता सौरभ दास ने न्यायपालिका पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया है कि देश के युवाओं और 'जेन-जी' के मताधिकार छीनने में शीर्ष अदालत की मिलीभगत रही है।
सौरभ दास ने सीधे तौर पर दो वरिष्ठ जजों का नाम लेते हुए कहा कि वेस्ट बंगाल और बिहार में विशेष पहचान व संशोधन (SIR) प्रक्रिया को बिना रोक-टोक चलने दिया गया। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची अब शांत रहें। दास का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के चलते युवाओं के वोटिंग अधिकार और राज्यों के निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हुए हैं।
CJP पदाधिकारी ने अदालत की प्राथमिकताओं पर उंगली उठाते हुए कहा कि जब समय रहते जरूरी संवैधानिक मामलों की सुनवाई होनी चाहिए थी, तब उन्हें टाल दिया गया। उन्होंने महाराष्ट्र में सरकार गिरने, राजनीतिक दलों में टूट और दिल्ली के संवैधानिक संकट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन सभी फैसलों में सत्ताधारी दल की मर्जी हावी रही। दास के अनुसार, इन घटनाओं ने न्यायपालिका की साख पर गहरा धब्बा लगाया है और अब बेंच चाहे जो रुख अपनाए, जनता व युवाओं की नजरों में अदालत की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है।
यह जुबानी हमला उस वक्त सामने आया है जब सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहाना की पीठ निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ दायर दो याचिकाओं की सुनवाई करने जा रही है। विवाद की जड़ में हालिया मीडिया खुलासे हैं, जिनमें दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों पर गंभीर एतराज जताया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई अहम फैसले दोनों आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना लिए गए, जिसके बाद उन्होंने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को पत्र भेजकर वोटर सॉफ्टवेयर की पारदर्शिता पर भी आपत्ति दर्ज कराई थी।
मामले में कानूनी शिकंजा कसने के लिए पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। इस याचिका में अदालत से यह तय करने की अपील की गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले उन शक्तियों का मनमाना उपयोग कर रहे हैं, जो पूरे निर्वाचन आयोग के पास सामूहिक रूप से होनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के दायित्वों से अलग रखा जाए। साथ ही अंतरिम व्यवस्था के तौर पर आयोग का कामकाज आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सर्वसम्मति से संचालित कराने और भविष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सीजेआई की मौजूदगी वाली समिति से ही कराने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।