रातभर चली सीक्रेट बैठक फेल; अडियाला जेल से इमरान खान की रिहाई पर बवाल, संसद के चारों तरफ भारी नाकेबंदी
पाकिस्तान के पूर्व पीएम और पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई को लेकर पड़ोसी मुल्क में सियासी पारा एक बार फिर उफान पर है। शहबाज शरीफ सरकार और पीटीआई नेताओं के बीच पूरी रात चली दूसरे दौर की सुलह वार्ता रविवार तड़के बिना किसी ठोस नतीजे के टूटने के बाद पार्टी ने राजधानी इस्लामाबाद की ओर निर्णायक 'लॉन्ग मार्च' का बिगुल फूंक दिया है। प्रदर्शनकारियों के बड़े हुजूम को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरी राजधानी में धारा 144 लागू कर दी है और रेड जोन समेत प्रमुख राजमार्गों और संसद भवन के इर्द-गिर्द शिपिंग कंटेनर रखकर रास्ते पूरी तरह सील कर दिए हैं।
पीटीआई कार्यकर्ताओं ने खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मारवत स्थित गांधी चौक से करीब 275 किलोमीटर लंबे पैदल मार्च का आगाज किया है। पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि राजधानी की ओर कूच कर रहे उनके करीब 2,000 समर्थकों को पुलिस और सुरक्षाबलों ने अलग-अलग इलाकों से हिरासत में ले लिया है। पहले यह मार्च 27 सितंबर को शुरू होना था, लेकिन सरकारी सख्ती के चलते तारीख बदलकर 4 अक्टूबर तय की गई थी। पार्टी की मुख्य मांग इमरान खान को तत्काल रिहा करने, जेल में पार्टी नेताओं से उनकी मुलाकात कराने और रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद पूर्व वजीर-ए-आजम की गिरती सेहत की जांच के लिए निजी मेडिकल टीम को अनुमति देने की है।
तय रूट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों का यह काफिला कई प्रमुख जिलों से गुजरते हुए इस्लामाबाद में दाखिल होगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 5 अक्टूबर को काफिला दोपहर 12:30 बजे करक से रवाना होकर रात को कोहाट के पास रुकेगा। 6 अक्टूबर को कोहाट, हांगू, कुर्रम और ओरकजई के कार्यकर्ता इसमें जुड़ेंगे और रात मट्टानी के पास डेरा डलेगा। इसके बाद 7 अक्टूबर को पेशावर के बुध बैर से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी कोहाट रोड ब्रिज और मोटरवे टोल प्लाजा पार कर चारसद्दा इंटरचेंज पहुंचेंगे, जहां 8 अक्टूबर को चारसद्दा और मोहम्मंद के हजारों समर्थक इस मार्च में शामिल होंगे।
उल्लेखनीय है कि 73 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर इमरान खान साल 2023 से सलाखों के पीछे हैं और उन पर भ्रष्टाचार, हिंसा भड़काने और तोशखाना समेत 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को उनकी आंखों की रोशनी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतों को देखते हुए इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल में मेडिकल जांच और इलाज का निर्देश दिया था। अब पीटीआई के इस विशाल मार्च ने शहबाज सरकार के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ बड़ी सियासी और आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है।