अगले 7 दिन आसमान से बरसेगी आफत! देश के 18 राज्यों में भारी तबाही की चेतावनी, बंद हुए कई नेशनल हाईवे
मौसम के बदलते मिजाज ने एक बार फिर देश के बड़े हिस्से में रहने वाली आम आबादी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां उत्तर पश्चिम भारत के लोग भीषण गर्मी और धूल भरी आंधियों का सामना कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ देश के एक बड़े हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी ने प्रशासन और जनता दोनों की नींद उड़ा दी है।
उपग्रह से मिली ताजा तस्वीरों के मुताबिक पूर्वी और मध्य भारत के आसमान पर इस समय मानसूनी बादलों का एक बड़ा घेरा बना हुआ है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत और पड़ोसी देश के ऊपर सक्रिय हुए चक्रवाती तंत्र और पश्चिमी विक्षोभ के आपस में मिलने के कारण देश के अठारह राज्यों में आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
अठारह राज्यों में भारी संकट की चेतावनी और पर्वतीय इलाकों में थमी जिंदगी
पहाड़ी राज्यों में रहने वाले स्थानीय लोगों और वहां गए पर्यटकों के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते पहाड़ों के दरकने का सिलसिला तेज हो गया है जिससे उत्तराखंड में जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त है। राज्य में दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत एक सौ छब्बीस प्रमुख संपर्क मार्ग पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो चुके हैं। ऋषिकेश से यमुनोत्री जाने वाला मुख्य मार्ग पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा है जिससे राहगीर बीच रास्ते में फंसे हुए हैं।
इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश और ऊपरी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश का सीधा असर मैदानी इलाकों पर दिख रहा है। हरियाणा से गुजरने वाली यमुना और मारकंडा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है जिससे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है। दिल्ली में भी नदी के उफान पर होने से निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है और हाल ही में यमुना में नहाने गए चार बच्चों के तेज बहाव में बह जाने की दर्दनाक घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अगले एक हफ्ते तक मूसलाधार आफत का अनुमान
मौसम विज्ञान केंद्र ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के अठारह राज्यों के लिए एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों में अगले छह से सात दिनों तक लगातार भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। यह स्थिति उन इलाकों के किसानों के लिए जहां चिंताजनक है वहीं शहरी इलाकों में जलजमाव और बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
राजस्थान और गुजरात के किसानों के लिए बढ़ी मुश्किलें
एक तरफ जहां देश का आधा हिस्सा पानी-पानी हो रहा है वहीं उत्तर पश्चिम भारत के कुछ राज्यों में मानसून की सुस्ती ने किसानों को संकट में डाल दिया है। राजस्थान और गुजरात के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ चुकी हैं। मौसम विभाग के ताजा अनुमान बताते हैं कि आगामी बीस जुलाई से पहले इन क्षेत्रों में भारी बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। विशेषकर जोधपुर और बीकानेर संभाग में मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने वाला है जिससे फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
धूल भरी आंधियों का संकट और हल्की फुहारों की उम्मीद
भले ही राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का इंतजार लंबा हो गया हो लेकिन कुछ जिलों के निवासियों को मामूली राहत मिल सकती है। आगामी चौदह और पंद्रह जुलाई को बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के आसपास के इलाकों में हल्की फुहारें गिरने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा जयपुर, भरतपुर और शेखावाटी के इलाकों में भी अगले पांच दिनों तक मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा लेकिन कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इन सब के बीच जोधपुर और बीकानेर के मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को अगले तीन दिनों तक चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली धूल भरी गर्म हवाओं का सामना करना पड़ेगा जो राहगीरों और आम जनता की दिक्कतों को और बढ़ाएगा।