10 अक्टूबर को इस्तीफा दे सकते हैं ज्ञानेस कुमार, जानें पूरा मामला
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा कर दिया।
भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपने सूत्रों के हवाले से कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त आगामी 10 अक्टूबर से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। गौरतलब है कि 10 अक्टूबर वही तारीख है, जिस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का बड़ा ऐलान कर रखा है। भारद्वाज के इस संक्षिप्त लेकिन सनसनीखेज बयान के बाद से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।
खुद को 'जेन जी' यानी युवाओं का प्रतिनिधि संगठन बताने वाली सीजेपी इससे पहले जून-जुलाई के दौरान नीट पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर करीब एक महीने तक चले आंदोलन के जरिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का दबाव बना चुकी है। अब इस युवा संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। 2 अक्टूबर को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने के बाद संगठन ने 'जंतर-मंतर 2.0' का आह्वान किया है। इस आंदोलन को आम आदमी पार्टी का भी खुला समर्थन मिल रहा है, जिसके चलते यह टकराव अब सीधे केंद्र और विपक्ष के बीच शक्ति प्रदर्शन में बदलता दिख रहा है।
आंदोलन की तारीख नजदीक आते ही टकराव और कानूनी शिकंजे की आशंकाएं भी गहराने लगी हैं। सीजेपी के प्रमुख रणनीतिकारों ने अंदेशा जताया है कि प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां उन पर कार्रवाई कर सकती हैं। संगठन के सह-संयोजक सौरभ दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके का दावा है कि उन्हें 10 अक्टूबर से पहले हिरासत में लिया जा सकता है। आशुतोष रांका ने आशंका जताई कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की तैयारी में है, जबकि अभिजीत दीपके का कहना है कि युवा नेतृत्व हर तरह की कानूनी कार्रवाई का सामना करने को तैयार है।