हैदराबाद की गुप्त लैब से निकला भारत का 'महा-घातक' हथियार, रक्षा मंत्रालय भी रह गया दंग

हैदराबाद की गुप्त लैब से निकला भारत का 'महा-घातक' हथियार, रक्षा मंत्रालय भी रह गया दंग

बात सिर्फ एक इंजन या मिसाइल की नहीं है, बात उस आत्मविश्वास की है जो सालों से विदेशी तकनीकों के पीछे छिपा हुआ था। आपको याद होगा कि एक समय था जब जेट इंजन बनाने की बात आते ही दुनिया के विकसित देश अपनी शर्तें थोपने लगते थे। लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है। हैदराबाद की एक छोटी सी लैब से निकलकर जब भारत का पहला स्वदेशी टर्बो जेट इंजन सामने आया तो दुनिया हैरान रह गई।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे किसी सरकारी कारखाने के एकाधिकार ने नहीं बल्कि एक भारतीय प्राइवेट कंपनी और हमारे वैज्ञानिकों की जुगलबंदी ने मुमकिन बनाया है। 22 जुलाई की तारीख को जब यह इंजन अधिकारियों के सुपुर्द किया गया, तो यह सिर्फ धातु का एक ढांचा नहीं था। यह भारत के उस सपने का सच होना था जिसे हम सालों से देखते आ रहे थे। 350 किलोग्राम की क्षमता वाला यह इंजन बताता है कि अगर सही मौका मिले तो हमारी देसी कंपनियां कमाल कर सकती हैं।

'कुशा' मिसाइल का सफल प्रहार

कहानी यही खत्म नहीं होती। अगले ही दिन 23 जुलाई को ओडिशा के कलाम द्वीप से जब 'कुशा' मिसाइल ने आसमान की तरफ उड़ान भरी और सीधे अपने लक्ष्य को नेस्तनाबूद कर दिया, तो संदेश साफ था। अब भारत की तरफ आंख उठाकर देखने से पहले किसी भी दुश्मन को सौ बार सोचना पड़ेगा। फाइटर जेट हों या फिर बिना पायलट वाले जासूसी ड्रोन, यह नई मिसाइल प्रणाली किसी को भी बख्शने के मूड में नहीं है।

रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की खुशी वाजिब है क्योंकि अब हमें इन घातक हथियारों के लिए दूसरे मुल्कों के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आत्मनिर्भरता का यह सफर सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि अब खुले आसमान में साफ-साफ उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

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