वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम कटने पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे, उठाए तीखे सवाल

वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम कटने पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे, उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूचियों (Voter List) की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान मच गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वोटर लिस्ट से अचानक करोड़ों नाम गायब होने और बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया है कि चुनावी राज्यों और रणनीतिक क्षेत्रों में सत्ताधारी दल के फायदे के हिसाब से मतदाता सूचियों में खेल किया जा रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में चुनावों की सुगबुगाहट तेज है और हर एक वोट की राजनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। इस गंभीर आरोप के बाद से राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है कि क्या लोकतंत्र की इस सबसे बड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता दांव पर लगी है।

क्या है पूरा मामला और खरगे के तीखे आरोप?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों के जरिए देश भर की वोटर सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने की आशंका जताई है। उनका सीधा आरोप था कि जहां सत्ताधारी पार्टी को चुनावी फायदा नजर आता है, वहां जानबूझकर नए वोटर्स जोड़े जाते हैं और जहां नुकसान की आशंका होती है या जो इलाके विपक्षी दलों के मजबूत गढ़ माने जाते हैं, वहां से सुनियोजित तरीके से लाखों-करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए जाते हैं। खरगे ने इसे लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह की गड़बड़ियों पर पूरी तरह निष्पक्षता दिखानी चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं। उनका यह बयान लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे और निष्पक्ष चुनाव कराने की निष्पक्षता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

लोकतंत्र की नींव और मतदाता सूचियों की पारदर्शिता का संकट

किसी भी लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं जब हर एक योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और उसे अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का पूरा अवसर मिले। यदि किसी भी कारण से पात्र नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से कट जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (Voter List Revision) के दौरान कई बार तकनीकी खामियों या प्रशासनिक लापरवाही के चलते बड़ी संख्या में नाम डिलीट हो जाते हैं, लेकिन जब इसके पीछे राजनीतिक साजिश के आरोप लगने लगें तो स्थिति बेहद संवेदनशील हो जाती है। विपक्ष का यह भी कहना है कि बिना उचित पूर्व सूचना या वेरिफिकेशन के नाम हटाना तानाशाही रवैये को दर्शाता है, जिससे आम जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था से भरोसा उठने का खतरा पैदा हो जाता है।

चुनाव आयोग की भूमिका और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी कार्यप्रणाली पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि वोटर लिस्ट से नाम काटने की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और यदि किसी का नाम काटा जाता है तो उसे समय रहते इसकी पुख्ता जानकारी दी जाए। वहीं, दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच वोटों के समीकरण साधने की यह जंग इस बात का सबूत है कि आने वाले चुनावों में मतदाता सूची एक बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाली है। मल्लिकार्जुन खरगे के इस आक्रामक तेवर ने साफ कर दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाला नहीं है और संसद से लेकर सड़क तक इसे लेकर जोरदार आवाज उठाई जाएगी ताकि हर एक नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रह सके।