दिवाली पर गोलगप्पे खाने से एक साथ 150 से ज्यादा की बिगड़ी तबीयत, 30 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती

दिवाली पर गोलगप्पे खाने से एक साथ 150 से ज्यादा की बिगड़ी तबीयत, 30 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती

रोशनी और खुशियों के महापर्व दिवाली के दिन देश के एक हिस्से से ऐसी डरावनी और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। दीवाली के उल्लास और आतिशबाजी के बीच बाजारों में जमकर खरीदारी और खानपान का दौर चल रहा था, तभी एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड ने जश्न की खुशियों को मातम में बदल दिया। शहर के एक व्यस्त बाजार में गोलगप्पे खाने के बाद अचानक एक या दो नहीं बल्कि 150 से अधिक लोगों की तबीयत एक साथ बिगड़ने लगी। देखते ही देखते उल्टी, दस्त, चक्कर और पेट दर्द की शिकायत के साथ मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने लगा, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।

एक ही ठेले से गोलगप्पे खाना पड़ा भारी, बच्चों और महिलाओं में दिखा ज्यादा असर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित लोगों ने बाजार में एक विशेष ठेले या दुकान से गोलगप्पे खाए थे, जिसके खाने के कुछ ही घंटों बाद उनके शरीर में फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखने लगे। इस अचानक हुए स्वास्थ्य संकट की चपेट में आने वालों में छोटे बच्चों और महिलाओं की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार की भीड़भाड़ के कारण दुकान पर काफी ज्यादा रश था और संभवतः दूषित पानी या खराब सामग्री के इस्तेमाल के कारण यह भयानक हादसा हुआ। जैसे-जैसे लोगों की तबीयत खराब होने की खबर फैली, पूरे बाजार में हड़कंप मच गया और परिजनों ने बिना देर किए मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों की तरफ दौड़ना शुरू कर दिया।

30 से ज्यादा गंभीर मरीजों को अस्पतालों में कराना पड़ा भर्ती, मची आपातकालीन स्थिति

मरीजों की संख्या इतनी अचानक और भारी मात्रा में बढ़ गई कि स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल के डॉक्टरों के लिए सबको संभालना मुश्किल हो गया। प्राथमिक जांच के बाद गंभीर रूप से पीड़ित 30 से अधिक लोगों को तुरंत अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती करना पड़ा, जहां उन्हें ड्रिप और जरूरी दवाइयां दी जा रही हैं। डॉक्टरों की मानें तो कई मरीजों की हालत डिहाइड्रेशन और फूड इन्फेक्शन की वजह से काफी नाजुक बनी हुई थी, हालांकि समय पर इलाज मिलने से उनकी जान खतरे से बाहर बताई जा रही है। अस्पताल के कमरों और गलियारों में मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ लगी हुई है, जिससे दीपावली की रात डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को भी बिना छुट्टी के पूरी रात मुस्तैद रहना पड़ा।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, सैंपल लेकर फूड सेफ्टी विभाग ने शुरू की जांच

इस बड़े पैमाने पर हुए फूड पॉइजनिंग कांड की भनक लगते ही जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग यानी फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीमें हरकत में आ गईं। अधिकारियों ने तुरंत उस ठेले और दुकान की पहचान करके उसे सील कर दिया जहां से ये गोलगप्पे बेचे गए थे। विभाग के अधिकारियों ने मौके से पानी, चटनी और अन्य सामग्रियों के नमूने यानी सैंपल्स कलेक्ट कर लिए हैं जिन्हें जांच के लिए लैबोरेटरी भेजा जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि आखिर किस चीज में जहर या खराबी फैली थी। प्रशासन ने शहर के अन्य सभी स्ट्रीट फूड वेंडर्स को भी कड़ी चेतावनी जारी की है कि वे साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

त्योहारों के सीजन में खानपान की शुद्धता और लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

यह दर्दनाक घटना एक बार फिर इस बात की ओर बड़ा इशारा करती है कि त्योहारों के इस व्यस्त सीजन में लोग उत्साह में आकर अपनी सेहत से जुड़ी सावधानियों को दरकिनार कर देते हैं। मुनाफा कमाने की होड़ में कई बार दूषित और बासी खाद्य पदार्थों की बिक्री खुलेआम होती है, जिसकी कीमत आम जनता को अपनी सेहत बिगाड़कर चुकानी पड़ती है। स्थानीय नागरिकों और बुद्धजीवियों ने मांग की है कि ऐसे लापरवाह दुकानदारों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यापारी लोगों की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।