इमरान खान को जेल में सड़ाने वाले असिम मुनीर को भूल गए पाकिस्तानी
भारत और पाकिस्तान के विश्लेषकों और कूटनीतिज्ञों के बीच बौद्धिक और राजनीतिक बहस अक्सर सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के मंचों पर तीखे मोड़ लेती रहती है। हाल ही में ऐसा ही एक हाई-प्रोफाइल वैचारिक टकराव देखने को मिला, जब पाकिस्तानी टिप्पणीकार और कानूनी विश्लेषक मुनीब कादिर ने भारतीय राजनीति, घरेलू फैसलों और कलाकारों की नागरिकता (जैसे अक्षय कुमार और आलिया भट्ट के पासपोर्ट मुद्दे) पर बयानबाजी करते हुए भारत सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की। इस पर भारतीय सेना के पूर्व शीर्ष अधिकारी और 15 कोर के कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीपी पांडे ने पाकिस्तानी विश्लेषक को आड़े हाथों लेते हुए ऐसा आईना दिखाया कि पूरे बहस का रुख ही पलट गया। डीपी पांडे ने पाकिस्तानी विश्लेषक को उनकी अपनी ही सरजमीं के कड़वे सच की याद दिलाते हुए सीधे तौर पर सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच जारी दमनकारी सत्ता संघर्ष का जिक्र किया।
मुनीब कादिर के बयान पर डीपी पांडे का पलटवार और सेना के प्रभाव की कड़वी सच्चाई
पाकिस्तानी टिप्पणीकार मुनीब कादिर द्वारा भारत के आंतरिक मामलों और लोकतंत्र पर सवाल उठाने का जवाब देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) डीपी पांडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद करारा संदेश लिखा। उन्होंने टिप्पणी की कि पाकिस्तानी विश्लेषक भारत पर उपदेश देने में इतने व्यस्त हैं कि वे अपने ही देश की जमीनी हकीकत और राजनीतिक व्यवस्था पर भ्रमित दिखाई देते हैं। डीपी पांडे ने मुनीब कादिर को स्पष्ट रूप से याद दिलाया कि जिस लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों का हवाला वे दे रहे हैं, उसी पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर ने देश के सबसे लोकप्रिय जननेता और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को महीनों से अदियाला जेल की सलाखों के पीछे बंद कर रखा है। भारतीय सैन्य अधिकारी का यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की राजनीति में वहां के सैन्य मुख्यालय (GHQ) के वर्चस्व और वहां के नागरिकों की वास्तविक स्थिति को बेनकाब करता है।
इमरान खान और असिम मुनीर के बीच दुश्मनी तथा पाकिस्तान में गहराता राजनीतिक संकट
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति किसी से छिपी नहीं है, जहां अगस्त 2023 से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान 190 से अधिक मामलों और मुकदमों का सामना करते हुए रावलपिंडी की जेल में कैद हैं। इमरान खान और पाकिस्तान के मौजूदा आर्मी चीफ जनरल असिम मुनीर की दुश्मनी बेहद व्यक्तिगत और पुरानी रही है। जब इमरान खान प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने असिम मुनीर को डीजी-आईएसआई (DG-ISI) के पद से अचानक हटा दिया था। बाद में, जब सेना में फेरबदल हुआ और असिम मुनीर थलसेना अध्यक्ष बने, तो सत्ता का पूरा संतुलन ही बदल गया। तब से लेकर आज तक इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का दावा है कि जनरल मुनीर उनसे बदला ले रहे हैं और उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करने के लिए सैन्य तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारतीय विदेश नीति और पाकिस्तान की मीडिया कूटनीति के लिए क्या है बड़ा संदेश?
पूर्व सैन्य अधिकारी डीपी पांडे की इस तीखी प्रतिक्रिया ने यह भी साफ कर दिया कि पाकिस्तानी मीडिया और विश्लेषक अक्सर अपनी घरेलू नाकामियों, सैन्य तानाशाही और चरमराती अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी एजेंडा चलाते हैं। लेकिन जब-जब वे भारतीय लोकतंत्र या भारत के आंतरिक मामलों पर उंगली उठाने की कोशिश करते हैं, उन्हें अपनी ही चरमराती व्यवस्था का सामना करना पड़ता है। भारत जहां अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और वैश्विक आर्थिक साख के लिए जाना जाता है, वहीं पाकिस्तान आज भी सेना के इशारों पर कठपुतली सरकारें चलाने और राजनीतिक विरोधियों को जेल भेजने की पुरानी नीति में उलझा हुआ है। इस बहस के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की सैन्य पकड़ और मानवाधिकारों की हकीकत उजागर हो गई है।