स्मृति ईरानी ने सुनाए पुराने किस्से, बताया देवेंद्र फडणवीस को देखकर क्यों होता है गर्व
बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अपने 24 वर्षों के राजनीतिक सफर की अनकही परतें खोली हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से मिली हार के बाद सक्रिय चुनावी राजनीति से थोड़ी दूरी बनाए रखने वाली ईरानी ने स्पष्ट किया कि संगठन में पद केवल एक दायित्व और अवसर होता है, निजी पहचान नहीं। राज्यसभा के रास्ते सत्ता में वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए संगठन की सेवा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
युवा मोर्चा के दिन और देवेंद्र फडणवीस के साथ पुरानी यादें
स्मृति ईरानी ने साल 2003 का जिक्र करते हुए बताया कि जब वह पहली बार भाजपा युवा मोर्चा में पदाधिकारी बनीं, उस दौर में महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनके साथ उपाध्यक्ष थे। उस समय दोनों 24-25 वर्ष के युवा कार्यकर्ता के रूप में प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे और नितिन गडकरी जैसे वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में काम करते थे।
उन्होंने कहा कि आज जब वह और फडणवीस मिलते हैं तो उन संघर्ष के दिनों को याद करके हंसते हैं। ईरानी ने बताया कि संगठन के दौरों के लिए वे घर से पेट्रोल के पैसे मांगती थीं और परिजनों के ताने भी सुनती थीं। आज देवेंद्र फडणवीस को इस मुकाम पर देखकर उन्हें बेहद गर्व महसूस होता है।
2004 का चांदनी चौक चुनाव और प्रवीण खंडेलवाल से जुड़ा वाकया
अपने शुरुआती चुनावी दौर को याद करते हुए स्मृति ईरानी ने 2004 के लोकसभा चुनाव का एक अनसुना किस्सा साझा किया। तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू के निर्देश पर उन्हें दिल्ली की चांदनी चौक सीट से प्रत्याशी बनाया गया था।
इस फैसले से वहां लंबे समय से संगठन का काम संभाल रहे प्रवीण खंडेलवाल का टिकट कट गया था और उन्हें ईरानी का डमी उम्मीदवार बनना पड़ा था। टिकट कटने के बाद खंडेलवाल बेहद मायूस थे। इस पर ईरानी ने उनसे हाथ जोड़कर माफी मांगी थी और ढांढस बंधाया था कि पार्टी एक दिन उनकी मेहनत का फल जरूर देगी। आज प्रवीण खंडेलवाल उसी चांदनी चौक सीट से सांसद हैं।
अमेठी का चुनावी मुकाबला
स्मृति ईरानी की संसदीय यात्रा का सबसे चर्चित पड़ाव उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट रही है। 2019 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पराजित कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा के सामने उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस उतार-चढ़ाव के बावजूद ईरानी ने संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की यात्रा हमेशा नए अवसर गढ़ती है।