वकीलों की खुली किस्मत! देश के 4 हाई कोर्ट्स में बने 'मी-लॉर्ड', कॉलेजियम की सिफारिश पर 30 नए जजों की नियुक्ति का एलान

वकीलों की खुली किस्मत! देश के 4 हाई कोर्ट्स में बने 'मी-लॉर्ड', कॉलेजियम की सिफारिश पर 30 नए जजों की नियुक्ति का एलान

भारतीय न्यायपालिका के विस्तार और मुकदमों के त्वरित निस्तारण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों पर मुहर लगाते हुए केंद्र सरकार ने देश के चार प्रमुख उच्च न्यायालयों (High Courts) में कुल 30 नए जजों की नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बड़ी नियुक्ति के बाद अदालतों में जजों की कमी से जूझ रहे तंत्र को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

किन 4 हाई कोर्ट्स में हुई है नियुक्तियां?

केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन चार बड़े राज्यों के उच्च न्यायालयों में जजों की यह ताबड़तोड़ नियुक्तियां की गई हैं, उनमें शामिल हैं:

  1. मद्रास उच्च कोर्ट: इस अदालत में सबसे ज्यादा नियुक्तियां हुई हैं, जहां कुल 15 जजों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें 5 वकीलों को सीधे परमानेंट जज के रूप में प्रमोट किया गया है, जबकि 10 अतिरिक्त जज (Additional Judges) बनाए गए हैं जिनमें वकील और न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।

  2. कलकत्ता उच्च कोर्ट: पश्चिम बंगाल के इस प्रमुख हाई कोर्ट के लिए कुल 8 वकीलों को बतौर अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है।

  3. कर्नाटक उच्च कोर्ट: इस सूची में कर्नाटक हाई कोर्ट के लिए भी योग्य वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त जज के रूप में जगह मिली है।

  4. मध्य प्रदेश उच्च कोर्ट: मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय के लिए भी कॉलेजियम की सिफारिश पर नियुक्ति की गई है।

वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की बल्ले-बल्ले

इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में वकालत के पेशे से जुड़े अनुभवी चेहरों और निचले तथा जिला स्तर की न्यायपालिका के बेहतरीन न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को 'मी-लॉर्ड' बनने का अवसर मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन 30 नियुक्तियों में से एक बड़ा हिस्सा योग्य वकीलों (Advocates) का है, जिन्हें सीधे बार से बेंच में पदोन्नत किया गया है। न्यायिक जगत में इसे वकीलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों पड़ी इन नियुक्तियों की जरूरत?

देश भर की अदालतों में लंबित मुकदमों (Pending Cases) का अंबार एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में संसद के सत्र के दौरान भी न्यायपालिका में रिक्तियों और मामलों के जल्द निपटारे को लेकर गंभीर चर्चाएं हुई हैं। ऐसे में कॉलेजियम द्वारा लगातार नामों की संस्तुति और सरकार द्वारा उन पर तेजी से मुहर लगाने से हाई कोर्ट्स की कार्यक्षमता में सुधार आएगा और आम जनता को समय पर न्याय मिल सकेगा।

 

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