WFH और वैक्यूम स्वीपिंग... GRAP-2 लागू होने के बाद दिल्ली-NCR में क्या खुला-क्या बंद?
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में जहरीले प्रदूषण और लगातार गिरते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के चलते हालात एक बार फिर से बेहद गंभीर हो गए हैं। हवा की रफ्तार धीमी होने और प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद पर्यावरण प्रबंधन प्राधिकरण (CAQM) ने कड़े कदम उठाते हुए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP का दूसरा चरण (GRAP-2) लागू कर दिया है। इसके लागू होते ही पूरे क्षेत्र में पाबंदियों का दौर शुरू हो गया है, जिससे आम जनजीवन और रोजमर्रा की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ना तय है। लोगों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि नए नियमों के बाद क्या खुला रहेगा और क्या पूरी तरह बंद रहेगा। आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि GRAP-2 के तहत दिल्ली-एनसीआर में क्या-क्या बदला है और किन चीजों पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।
सड़कों पर वैक्यूम स्वीपिंग और पानी का छिड़काव हुआ तेज
GRAP-2 लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव सड़कों पर उड़ने वाली धूल (Dust Pollution) को रोकने के लिए किया गया है। स्थानीय नगर निकायों और सड़क निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रमुख मार्गों और चौराहों पर नियमित रूप से मैकेनिकल या वैक्यूम स्वीपिंग (Vacuum Sweeping) करवाएं। इसके साथ ही धूल के कणों को हवा में उड़ने से रोकने के लिए पानी और डस्ट सप्रेसेंट (Dust Suppressant) का छिड़काव दिन में कई बार सुनिश्चित किया जाएगा। प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट वाले इलाकों में विशेष निगरानी टीमें तैनात कर दी गई हैं, जो कचरे के खुले में जलने और निर्माण स्थलों पर नियमों की धज्जियां उड़ने पर भारी जुर्माना वसूल रही हैं।
क्या स्कूल और कॉलेज रहेंगे बंद या चलेंगे सामान्य रूप से?
अक्सर विंटर सीजन और प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप के बीच बच्चों के स्कूलों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता बनी रहती है। ताजा दिशानिर्देशों के अनुसार, GRAP के दूसरे चरण (Stage-II) के तहत फिलहाल स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। सभी स्कूल और कॉलेज सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और कक्षाएं तय समय पर संचालित होंगी। हालांकि, प्रशासन ने स्कूलों को यह सलाह दी है कि वे बच्चों को अत्यधिक प्रदूषण के समय आउटडोर गतिविधियों या खेलकूद में शामिल होने से बचाएं ताकि उनकी सेहत पर बुरा असर न पड़े।
वर्क फ्रॉम होम (WFH) और दफ्तरों के समय में क्या हुआ बदलाव?
बढ़ते प्रदूषण और यातायात के भारी दबाव को कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों को लेकर अहम कदम उठाए गए हैं। हालांकि GRAP-2 के अंतर्गत अनिवार्य रूप से पूरी तरह से वर्क फ्रॉम होम (WFH) घोषित नहीं किया गया है, लेकिन दिल्ली और एनसीआर के प्रशासनिक प्रशासन ने ट्रैफिक कंजेशन को नियंत्रित करने के लिए दफ्तरों के समय में बदलाव (Staggered Timings) करने और निजी व सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की शारीरिक उपस्थिति को सीमित कर हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम के विकल्पों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम और दिल्ली सरकार के कार्यालयों के समय में बदलाव लागू कर दिए गए हैं ताकि सड़कों पर पीक आवर्स में गाड़ियों का दबाव कम से कम हो।
वाहनों की आवाजाही पर सख्ती और पार्किंग फीस हुई दोगुनी
सड़क पर वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नकेल कसने के लिए परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों (विशिष्ट मानदंडों से नीचे के डीजल और पेट्रोल वाहन) की एंट्री पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर आकर्षित करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग फीस को दोगुना कर दिया गया है, हालांकि मेट्रो स्टेशनों की पार्किंग को इस बढ़ोतरी से छूट दी गई है। वैध पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट न होने पर पेट्रोल पंपों पर ईंधन न मिलने का नियम भी कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
डीजल जनरेटर (DG Sets) और कंस्ट्रक्शन पर क्या हैं नियम?
औद्योगिक इकाइयों और डीजल जनरेटरों के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध प्रभावी कर दिए गए हैं। बिजली के वैकल्पिक स्रोत के रूप में डीजल जनरेटरों के नियमित इस्तेमाल पर रोक है, सिवाय आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के। इसके अलावा, निर्माण और विध्वंस (C&D) गतिविधियों पर धूल नियंत्रण के कड़े नियम लागू किए गए हैं। धूल उड़ाने वाली और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि प्रदूषण के स्तर को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके।
नागरिकों से प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग की अपील
प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञों ने दिल्ली-एनसीआर के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस विकट परिस्थिति में अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं। जितना हो सके अपने निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस या कारपूल का इस्तेमाल करें। अपने वाहनों का समय पर प्रदूषण जांच (PUC) करवाएं और कूड़ा-कचरा या बायोमास बिल्कुल न जलाएं। आपकी छोटी सी सावधानी और सतर्कता ही इस जानलेवा प्रदूषण के कोहरे से दिल्ली-एनसीआर को राहत दिला सकती है।