चूल्हा-चौका संभालने वाली महिलाएं बन रहीं बिजनेसवुमन, मुरादाबाद की ज्योति मुफ्त में सिखा रहीं कमाई के तरीके

चूल्हा-चौका संभालने वाली महिलाएं बन रहीं बिजनेसवुमन, मुरादाबाद की ज्योति मुफ्त में सिखा रहीं कमाई के तरीके

उत्तर प्रदेश के पीतल नगरी कहे जाने वाले मुरादाबाद जिले से महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां की रहने वाली ज्योति गुप्ता ने समाज की उन साधारण गृहिणियों के जीवन में बदलाव का बीड़ा उठाया है जो अपनी पूरी जिंदगी घर के चूल्हे-चौके और पारिवारिक जिम्मेदारियों तक ही सीमित रखती थीं। ज्योति अपनी इस मुफ़्त स्किल ट्रेनिंग पहल के जरिए ऐसी दर्जनों महिलाओं को न केवल हस्तशिल्प और व्यावसायिक कौशल सिखा रही हैं, बल्कि उन्हें अपने दम पर घर बैठे कमाई करने के तरीके भी बता रही हैं। उनकी इस कोशिश से अब तक कई महिलाएं आत्म-निर्भर बनकर अपने परिवारों का संबल बन चुकी हैं। मुरादाबाद के स्थानीय इलाकों में शुरू हुई यह पहल अब धीरे-धीरे आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आशा की एक नई किरण बनकर उभर रही है।

मुफ्त ट्रेनिंग से हुनर की पहचान: कैसे गृहणियों को बिजनेसवुमन बना रही हैं ज्योति

ज्योति गुप्ता का मानना है कि हर महिला के भीतर कोई न कोई हुनर छिपा होता है, बस जरूरत उसे सही दिशा और मंच देने की है। वे अपनी कार्यशालाओं में महिलाओं को विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित सामान जैसे मोमबत्ती मेकिंग, इको-फ्रेंडली बैग्स, सजावटी पीतल की वस्तुएं, सिलाई-कढ़ाई और होम-बेस्ड पैकेजिंग उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग बिल्कुल मुफ्त प्रदान करती हैं। इसके साथ ही, वे केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखातीं, बल्कि उन्हें बाजार की मांग को समझने, कच्चे माल की खरीद-बिक्री और अपने सामान की सही कीमत तय करने की पूरी मार्केटिंग रणनीति भी समझाती हैं। जो महिलाएं कभी बैंक के काम या व्यावसायिक बातचीत से डरती थीं, वे आज ज्योति की गाइडेंस में अपनी छोटी-छोटी यूनिट्स चला रही हैं और सीधे खरीदारों से डील कर रही हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और लोकल मार्केट का मिला सहारा: घर बैठे शुरू हुई लाखों की बिक्री

आज के समय में तकनीक और इंटरनेट व्यापार को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, और ज्योति इस बात को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग ले रही महिलाओं को व्हाट्सएप बिजनेस, इंस्टाग्राम और स्थानीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल की बारीकियाँ सिखाई हैं। इसके जरिए ये महिलाएं अब घर के काम निपटाने के बाद बचे हुए समय में ऑनलाइन ऑर्डर लेती हैं और अपने हाथों से बनाए गए सामान को न केवल मुरादाबाद बल्कि देश के अलग-अलग शहरों में भेज रही हैं। त्यौहारों के सीजन में इनके बनाए सजावटी सामानों और गिफ्ट हैंपर्स की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इस डिजिटल रीच ने इन महिलाओं के काम को स्थानीय सीमाओं से निकालकर एक बड़ा बाजार दे दिया है, जिससे इनकी मासिक आय में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है।

समाज की सोच में आ रहा है बड़ा बदलाव: आत्मनिर्भरता से बढ़ा महिलाओं का मान-सम्मान

ज्योति गुप्ता के इस जमीनी प्रयास का असर अब सामाजिक स्तर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जिन परिवारों में पहले महिलाओं के बाहर काम करने या बिजनेस करने को सहजता से नहीं स्वीकार किया जाता था, आज वही परिवार इन महिलाओं की सफलता और आर्थिक योगदान को देखकर गर्व महसूस कर रहे हैं। बच्चों की अच्छी शिक्षा, घर के खर्चों में हाथ बंटाना और अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहना इन महिलाओं के आत्मविश्वास को एक नए स्तर पर ले गया है। मुरादाबाद का यह मॉडल इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर एक महिला ठान ले, तो वह न केवल अपना जीवन बदल सकती है बल्कि समाज की कई अन्य महिलाओं को भी सशक्त और आत्मनिर्भर बना सकती है।