Navratri 2021: इस देवी मंदिर में महिलाओं को नहीं मिलता प्रवेश, जानें पूजा की अनोखी परंपरा

बिहार के मुंडेश्वरी धाम मंदिर में नवरात्रि पर विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता। इसके साथ ही यहां रक्तहीन बलि की परंपरा है। यह अनोखी परंपरा...

नवरात्रि के दिनों में देवी के मंदिरों में मां की आराधना का विशेष महत्व होता है। इन दिनों देवी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। देवी मंदिरों में महिलाओं को पूजा का विशेष अधिकार प्रदान किया जाता है लेकिन बिहार में देवी का एक मंदिर ऐसा भी है जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इस मंदिर में महिलाएं देवी को बाहर से तो प्रणाम कर सकती हैं लेकिन अंदर प्रवेश नहीं कर सकती हैं। वहीं, एक मंदिर ऐसा भी है जहां पर देवी की पूजा की पंरपरा अनोखी है। यह परंपरा अच्छी सीख देने वाली है। तो आइए जानते हैं कुछ देवी मंदिरों खास बातें।

Mundeshwari Dham Temple

इस मंदिर में रक्तहीन बलि देने की है परंपरा

बिहार के मुंडेश्वरी धाम मंदिर में नवरात्रि पर विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता। इसके साथ ही यहां रक्तहीन बलि की परंपरा है। यह अनोखी परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। आमतौर पर देवी के मंदिरों में पशुबलि दी जाती हैं, लेकिन बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर में पवरा पहाड़ी पर स्थित देवी मुंडेश्वरी के मंदिर में पशुबलि नहीं दी जाती। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है।

बकरे पर आती है दिव्य शक्ति

देवी मुंडेश्वरी के इस मंदिर में श्रद्धालु चढ़ावे में बकरा चढ़ाते हैं। इसके बाद जब यहां के पुजारी बकरे को देवी मुंडेश्वरी के चरण में रखते हैं तो बकरे में एक दिव्य शक्ति का समावेश होता है। मान्यता है कि जैसे ही बकरे के ऊपर देवी के चरण में रखे अक्षत को डाला जाता है तो वह अचेत होकर उनके चरणों में गिर जाता है। कुछ समय पश्चात जैसे ही पुजारी दोबारा देवी के चरण से लेकर अक्षत उस पर डालते हैं वह सामान्य होकर खड़ा हो जाता है। इसके बाद इस बकरे को श्रद्धालु को वापस कर दिया जाता है। यह पंरपरा अनोखी होने के साथ अचरज करने वाली है।

इस देवी मंदिर में महिलाओं को नहीं मिलता प्रवेश

महाराष्ट्र में लंबी कानूनी कड़ाई के बाद महिलाओं को शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश का अधिकार तो मिल गया, लेकिन बिहार के एक गांव में स्थित एक देवी मंदिर में आज भी महिलाओं को नवरात्रि के दिनों में देवी की पूजा करने का अधिकार नहीं मिला है। दरअसल यहां इसे एक परंपरा की तरह माना जाता है। यह मंदिर बिहार के नालंदा जिले के पावापुरी में घासरावां गांव में स्थित है। इसे आशापुरी मंदिर के नाम से जाना जाता है।

आशापुरी मंदिर में देवी दुर्गा की पूजा होती है और सभी को पूजा का अधिकार भी है, लेकिन नवरात्रि में इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित कर दिया जाता है। महिलाएं नवरात्रि में देवी मंदिर के बाहर ही उनको प्रणाम कर वापस लौट जाती हैं। इस सबंध में मंदिर प्रबंधकारिणी समिति का कहना है कि नवरात्रि के दिनों में मंदिर में तांत्रिक पूजा की जाती है इसलिए यहां महिलों का प्रवेश वर्जित कर दिया जाता है। यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है और महिलाएं भी इस परंपरा को पूरे मन से स्वीकार करती हैं।

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