Navratri: शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होने से पहले जान लें दुर्गा पूजा की प्रमुख तिथियां

पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होता है।

पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मां दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्रि शुरु होती है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा क्रमश: की जाती है। दशहरा के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण का पुतला दहन भी किया जाता है, वहीं विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की मूर्तियों का विधि विधान से विसर्जन भी होता है। इस दिन शस्त्र पूजा भी की जाती है। दुर्गाष्टमी, महानवमी और दशहरा कब है। आप पहले से ही उनकी सही तिथियों के बारे में जान लें ताकि आप नवरात्रि की पूजन सामग्री का प्रबंध पहले ही कर लें और विधिपूर्वक नवरात्रि का व्रत एवं दुर्गा पूजा कर पाएं।

Maa Durga

शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ-

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 07 अक्टूबर दिन गुरुवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से हो रहा है। इस दिन ही कलश स्थापना या घट स्थापना होगा और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। जिन लोगों को नौ दिन व्रत रखना होगा, वे कलश स्थापना के साथ नवरात्रि व्रत एवं मां दुर्गा की पूजा का संकल्प लेंगे और व्रत शुरू करेंगे। जो लोग एक दिन का नवरात्रि व्रत रहेंगे, वो अगले दिन व्रत का पारण कर लेंगे और फिर दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखेंगे एवं कन्या पूजन करेंगे।

8 दिन की है नवरात्रि –

इस वर्ष की नवरात्रि आठ दिनों की है क्योंकि आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि का क्षय हो रहा है। इस कारण से आठ दिनों की नवरात्रि है।

दुर्गाष्टमी-

नवरात्रि में प्रथम दिन के बाद अष्टमी का बहुत महत्व होता है। इसे दुर्गाष्टमी या महाष्टमी कहते हैं। इस वर्ष दुर्गाष्टमी 13 अक्टूबर दिन बुधवार को है। इस दिन मां महागौरी की पूजा होती है। जो लोग प्रथम दिन व्रत रखते हैं, वे महाष्टमी का भी व्रत रखते हैं।

नवरात्रि कन्या पूजा-

कई स्थानों पर नवरात्रि में कन्या पूजन महाष्टमी के दिन किया जाता है और कई स्थानों पर महानवमी के दिन। यदि आप दुर्गाष्टमी के दिन करते हैं तो कन्या पूजन 13 अक्टूबर को होगा और यदि महानवमी के दिन करते हैं तो कन्या पूजन 14 अक्टूबर को होगा। इस दिन कन्याओं को भोजन कराने, उनका पूजन करने और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लेने की परंपरा है।

महानवमी-

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की महानवमी 14 अक्टूबर दिन गुरुवार को है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और हवन किया जाता है।

विजशदशमी –

इस वर्ष दशहरा या विजशदशमी 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है। इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता है। रामलीला में रावण वध का मंचन होता है। विजयादशमी के दिन दुर्गा मूर्ति का विसर्जन भी किया जाता है। हालांकि य​ह मुहूर्त पर निर्भर करता है। दशहरा या विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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