img

Up Kiran, Digital Desk: हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को अमेरिका लाया गया है, जहां उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। यह हमला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। अमेरिका ने वेनेजुएला की सत्ता को अपने हाथ में लेने का फैसला किया है। इसके पीछे मुख्य कारण वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधन माने जा रहे हैं, जिनकी महत्वाकांक्षा अमेरिका को खासी आकर्षित कर रही है।

भारत को आर्थिक लाभ की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लेता है, तो इसका लाभ भारत जैसे देशों को हो सकता है। भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर हो सकता है, जहां तेल उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ लंबित आर्थिक दावों की वसूली भी संभव हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल भंडार पर नियंत्रण से भारत को लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर की बकाया राशि की वसूली में मदद मिल सकती है।

भारत का वेनेजुएला के तेल क्षेत्र से जुड़ाव
भारत की तेल कंपनियां, खासकर ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल), वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। ओवीएल, विशेष रूप से, 'सैन क्रिस्टोबल' तेल क्षेत्र में साझेदारी करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वहां उत्पादन में भारी कमी आई थी। इन प्रतिबंधों के कारण ओवीएल को आवश्यक उपकरण और तकनीक तक पहुंचने में समस्या आ रही थी, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि, अब अमेरिका के नियंत्रण में बदलाव से इन प्रतिबंधों में ढील की संभावना है, जो उत्पादन में तेजी ला सकती है।

भारत के तेल निर्यातक देशों के लिए मौका
भारत के लिए यह घटनाक्रम एक नए अवसर का संकेत हो सकता है। वेनेजुएला के तेल क्षेत्र से उत्पादन में वृद्धि होने से भारत की प्रमुख रिफाइनरी कंपनियों को फायदा हो सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, नयारा एनर्जी, और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला से भारत के तेल आयात का रास्ता फिर से खुल सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है।