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Up Kiran, Digital Desk: पंजाब के भट्ठा उद्योग में एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। राज्य सरकार द्वारा माइनिंग नीति न बनाने के कारण लगभग आधे भट्ठे बंद पड़े हैं, जिससे इस उद्योग से जुड़े पांच लाख मजदूरों और उनके 25-30 लाख पारिवारिक सदस्यों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर स्थिति यूं ही बनी रही, तो यह समस्या और भी विकट हो सकती है, जिससे बड़ी बेरोजगारी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

कोयले में मिलावट: भट्ठा उद्योग की जड़ में संकट

राज्य के भट्ठा उद्योग को कोयले की आपूर्ति में हो रही समस्याएं भी इस संकट को और बढ़ा रही हैं। कांडला पोर्ट से आने वाले कोयले में घटिया गुणवत्ता का कोयला मिक्स किया जा रहा है, जो भट्ठा उद्योग के लिए भारी नुकसान का कारण बन रहा है। इसके अलावा, कोयले की गाड़ियों पर पानी डालकर उनका वजन बढ़ा दिया जा रहा है, जिससे कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

भट्ठा मालिकों और उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने इस घोटाले की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण न केवल भट्ठा उद्योग संकट में है, बल्कि यह पूरे पंजाब की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। भट्ठा मालिकों ने यह आरोप भी लगाया है कि इन समस्याओं की अनदेखी के कारण भट्ठा उद्योग पर काम करने वाले मजदूरों की रोजी-रोटी और उनके परिवारों का भविष्य संकट में पड़ चुका है।