इस डर से घर लौट रहे प्रवासियों का दर्द, कहा- नमक रोटी खाएंगे अब परदेस में कमाने नहीं जाएंगे

मार्केट बंद कराए जा रहे हैं, स्कूल-कॉलेज बंद हो चुके हैं, तो ऐसे में एक बार फिर प्रवासी श्रमिकों के बीच दहशत का माहौल बन गया है और वह अपने गांव की ओर भाग रहे हैं।

भारत के कई इलाकों में कोरोना के दूसरे अटैक से दहशत का माहौल बन गया है। कई प्रदेशों में संक्रमण को रोकने के लिए नए गाइडलाइन तय किए गए हैं, नाइट कर्फ्यू लगाए जा रहे हैं। मार्केट बंद कराए जा रहे हैं, स्कूल-कॉलेज बंद हो चुके हैं, तो ऐसे में एक बार फिर प्रवासी श्रमिकों के बीच दहशत का माहौल बन गया है और वह अपने गांव की ओर भाग रहे हैं।

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वायरस के बढ़ते मामले और निरंतर जारी किए जा रहे गाइडलाइन के कारण दिल्ली, मुम्बई आदि शहरों में रह रहे प्रवासी लॉक डाउन की आशंका से भयभीत हैं। उन्हें लग रहा है कि लॉक डाउन हो गया तो दिल्ली और मुम्बई जैसे राज्य की सरकार बाहरी मजदूरों के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर पाती है और उन्हें फिर पैदल गांव जाना पड़ेगा। इससे बेहतर है कि अभी ट्रेन चल रही है और गांव की ओर रुख किया जाए। इसी को लेकर प्रवासी मजदूरों के घर वापसी का सिलसिला काफी तेज हो गया है और सिर्फ बेगूसराय जिला में प्रत्येक दिन पांच सौ से अधिक प्रवासी घर आ रहे हैं।

दिल्ली से आने वाले प्रवासियों के लिए वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस वरदान बन रही है। रोज बरौनी और बेगूसराय स्टेशन पर प्रवासी श्रमिक की भीड़ उतरती है। किंतु इसमें दुखद पहलू यह भी है कि स्टेशन पर बाहर से आने वालों के लिए ना जांच की कोई व्यवस्था है और ना उन्हें जांच के बाद ही घर जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बेगूसराय में पिछले सप्ताह से संक्रमितों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है और करीब-करीब सभी संक्रमित बाहर से ही आने वाले हैं। किंतु स्टेशन पर कोई व्यवस्था नहीं रहने से गांव में संक्रमितों की संख्या बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

वैशाली एक्सप्रेस के माध्यम से दिल्ली से लौटे संतोष राम, राधे राम, विपिन राम, सुमन चौधरी एवं भोला महतों आदि ने बेगूसराय स्टेशन पर बताया कि हम लोग कई साल से दिल्ली में रहकर मजदूरी करते पिछले साल जब लॉक डाउन हो गया तो वहां कोई व्यवस्था नहीं रहने के कारण किसी तरह कहीं पैदल कहीं किसी वाहन के सहारे जलालत झेलकर गांव पहुंचे थे। गांव में सरकारी स्तर पर कोई काम नहीं मिला, काफी प्रयास से खोज-खोजकर मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते रहेे, किंतु ऐसा कब तक चलता।

सरकार ने जब स्पेशल ट्रेन चलाई तो हम लोग अक्टूबर में फिर से दिल्ली चले गए। वहां मालिक ने बुलाया था, काम भी अच्छी तरह से मिलता। किंतु अब जब एक बार फिर कोरोना ने अटैक कर दिया है तो दिल्ली डरने लगाा। वहां 24 घंटा मन में भय बना रहता था कि अगर लॉक डाउन लग गया तो फिर हम क्या खाएंगे, कहां रहेंगे, गांव कैसे जाएंगे। इधर गांव से भी बार-बार फोन आ रहा था कि कोरोना फैल रहा है घर लौट जाओ। लॉक डाउन के डर से हम लोग गांव आ गए हैं। अब किसी भी हालत में परदेस नहीं जाएंगे, नमक रोटी खाकर भी गांव में ही रहेंगे।

इन श्रमिकों ने बताया कि दिल्ली में रहने वाले हजारों-लाखों लोग लॉक डाउन के डर से गांव आने के लिए परेशान हैं, ट्रेन चल रही है, किंतु टिकट नहीं मिल पाता है। रिजर्वेशन कराने के लिए चार-पांच दिन स्टेशन पर जाकर लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, उसके बाद भी टिकट की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। थक हारकर लोग दलालों के शरण में जा रहे हैं, हम लोग लोगों ने भी दो-दो हजार में दलाल के माध्यम से टिकट खरीदा है। सरकार हम प्रवासी मजदूरों के लिए पिछले साल की तरह है श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए, अन्यथा दिल्ली में रह रहे श्रमिक मानसिक रूप से काफी परेशान हो जाएंगे।

 

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