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Up kiran,Digital Desk : प्रयागराज में माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से विदा लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनकी पहचान और सम्मान पर प्रश्न चिह्न लगाया जाएगा।

स्वामी ने बताया कि माघ मेला में स्नान केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था और अंतरात्मा की संतुष्टि का माध्यम है। लेकिन हालात ऐसी बने कि उन्हें संगम में स्नान किए बिना ही वापस जाना पड़ा। उन्होंने प्रशासन द्वारा सम्मानपूर्वक स्नान का प्रस्ताव ठुकरा दिया, क्योंकि इससे उस दिन घटित घटना का न्याय अधूरा रह जाता।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रयागराज की पवित्र धरती पर जो कुछ घटित हुआ, उसने उनकी आत्मा को झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती, और सत्य की गूंज उनके पीछे हमेशा रहेगी।

संत समाज और श्रद्धालुओं ने उनके फैसले पर गहरी संवेदना जताई। स्वामी ने कहा कि इस पीड़ा और अन्याय के बावजूद, उनका विश्वास सनातन धर्म, सत्य और मानवता पर अडिग बना रहेगा।