विधानसभा चुनाव से पहले नशे के खिलाफ मान सरकार को घेरने का मेगा प्लान

विधानसभा चुनाव से पहले नशे के खिलाफ मान सरकार को घेरने का मेगा प्लान

उत्तर भारत की राजनीति में सीमावर्ती राज्य पंजाब का राजनीतिक घटनाक्रम इन दिनों बेहद तेज गति से बदल रहा है और राज्य की आबोहवा में चुनावी सरगर्मी साफ तौर पर महसूस की जाने लगी है। आने वाले समय में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए देश की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पंजाब की सियासत में अपनी पैठ को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इस रणनीति के तहत देश के केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह महज 21 दिनों के भीतर दूसरी बार पंजाब के दौरे पर आ रहे हैं। अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की भगवंत मान सरकार पर कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से राज्य में पैर पसार चुके ड्रग्स (नशे के कारोबार) के मुद्दे को लेकर चौतरफा दबाव बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि गृह मंत्री का यह दौरा महज एक सामान्य प्रशासनिक या सांगठनिक बैठक नहीं है, बल्कि यह मान सरकार को नशे के दलदल और सुरक्षा के मोर्चे पर घेरने का एक सुविचारित राजनीतिक मास्टरप्लान है, जिसके जरिए बीजेपी पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह पलटने की तैयारी में जुटी हुई है।

पंजाब में नशे का मुद्दा और भगवंत मान सरकार की बढ़ रही राजनीतिक मुश्किलें

पंजाब की धरती पर ड्रग्स यानी नशा एक ऐसा संवेदनशील और गहरा जख्म बन चुका है, जिसने पिछले कई दशकों से राज्य की युवा पीढ़ी को अंदर से खोखला कर दिया है। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) ने सत्ता में आने से पहले यह वादा किया था कि वे सरकार बनते ही कुछ ही महीनों में पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बना देंगे। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि राज्य के गांवों और शहरों में चिट्ठी और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे विपक्षी दल लगातार मान सरकार पर हमलावर हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह दौरा इसी सुलगते हुए मुद्दे के इर्द-गिर्द केंद्रित बताया जा रहा है। गृह मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, शाह राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, बीएसएफ (BSF) के कमांडरों और खुफिया एजेंसियों के साथ एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें सीमा पार से होने वाली हथियारों और ड्रग्स की तस्करी को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए एक नए और आक्रामक ब्लूप्रिंट पर मुहर लगाई जाएगी।

बीजेपी का चुनावी शंखनाद: संगठन को धार देने और नए समीकरणों की तलाश

विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अपने दम पर और मजबूत सहयोगियों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति पर काम कर रही है। अमित शाह के इस दौरे का एक बड़ा मकसद पार्टी के स्थानीय संगठन में जोश भरना और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है। पिछले कुछ समय से कृषि कानूनों और अन्य स्थानीय मुद्दों के कारण पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को लेकर जो नाराजगी देखी जा रही थी, उसे दूर करने के लिए पार्टी नेतृत्व अब सुरक्षा, राष्ट्रवाद और नशा मुक्ति जैसे बड़े मुद्दों को जनता के बीच लेकर जाने की योजना बना रहा है। गृह मंत्री पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों के साथ बंद कमरे में मैराथन बैठकें करेंगे, जिसमें यह तय किया जाएगा कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों को किस प्रकार एक साथ घेरा जाए। पंजाब की जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि राज्य में कानून-व्यवस्था और ड्रग्स माफिया पर लगाम लगाने के लिए केंद्र की मजबूत इच्छाशक्ति का होना कितना आवश्यक है।

विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया और राजनीतिक सरगर्मी तेज

जैसे ही केंद्रीय गृह मंत्री के 21 दिनों के भीतर दूसरी बार पंजाब आने का कार्यक्रम तय हुआ, राज्य की सियासत में भूचाल सा आ गया है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी के इस दौरे पर तंज कसते हुए इसे सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट करार दिया है। 'आप' नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा के नाम पर केवल राजनीति कर रही है, जबकि पंजाब पुलिस अपनी तरफ से नशा तस्करों के खिलाफ लगातार ऐतिहासिक और ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी ने भी इस दौरे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि पिछले सालों में पंजाब की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र ने कोई विशेष पैकेज नहीं दिया है, और अब चुनाव नजदीक आते ही केंद्रीय नेताओं के दौरे शुरू हो गए हैं। इन तमाम राजनीतिक बयानों और पलटवार के बीच यह साफ है कि आने वाले दिनों में पंजाब का सियासी पारा और अधिक चढ़ने वाला है।

पंजाब की जनता की निगाहें और इस दौरे के दूरगामी परिणाम

आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अमित शाह के इस हाई-प्रोफाइल दौरे पर टिकी हुई हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि इस दौरे के बाद नशे के खात्मे के लिए केंद्रीय एजेंसियों और राज्य प्रशासन के बीच किस तरह का नया तालमेल देखने को मिलता है। क्या बीजेपी इस बार पंजाब के चुनावी दंगल में एक मजबूत तीसरे या मुख्य विकल्प के रूप में उभरने में कामयाब हो पाएगी, या फिर पारंपरिक दलों की खींचतान के बीच मुकाबला रोमांचक रहेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों की राजनीतिक चालों पर निर्भर करेंगे। फिलहाल, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमित शाह का यह ताबड़तोड़ दौरा पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े उलटफेर की पटकथा लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिससे विपक्षी दलों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है।