मनपसंद पोस्टिंग के लिए करोड़ों की घूस! पंजाब के आला अफसरों पर गिरेगी गाज
पंजाब में सरकारी तंत्र के भीतर अधिकारियों की मनपसंद पोस्टिंग, टेंडर आवंटन और नीतिगत फैसलों में रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ और नीतिगत स्तर पर भ्रष्टाचार से जुड़े इस समूचे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपते हुए नियमित एफआईआर दर्ज करने के साफ निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कर दो महीने के भीतर अदालत में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पंजाब पुलिस को जांच के दौरान सीबीआई को हर स्तर पर पूर्ण प्रशासनिक व तकनीकी सहयोग प्रदान करने का फरमान भी सुनाया गया है।
यह समूचा घटनाक्रम एडवोकेट निखिल सराफ की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट की दखल के बाद सामने आया। याचिका में राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों और बिचौलियों के गठजोड़ पर आरोप लगाया गया था कि सरकारी महकमों में मनमाफिक तबादलों, टेंडरों की बंदरबांट और खास लोगों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियां तय करने के बदले करोड़ों रुपयों का अवैध लेनदेन चल रहा था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस गड़बड़ी को लेकर पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तीन आधिकारिक पत्र भेजकर सतर्क किया था, मगर इन चेतावनियों के बावजूद राज्य पुलिस की ओर से कोई ठोस या प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इसी निष्क्रियता के चलते उन्होंने हाईकोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की गुहार लगाई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए ईडी द्वारा डीजीपी को भेजी गई सभी चिट्ठियों को न्यायिक रिकॉर्ड पर तलब किया था। वहीं सीबीआई ने अदालत में स्पष्ट कर दिया था कि यदि पीठ जांच का जिम्मा उसे सौंपती है तो वह निष्पक्ष तफ्तीश के लिए पूरी तरह तैयार है। दूसरी तरफ, पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच की मांग का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया था कि ईडी की भूमिका आपत्तिजनक है और राज्य सरकार अपने स्तर पर ही इन आरोपों की पड़ताल करने में सक्षम है। हालांकि अदालत ने सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए जांच सीबीआई के हवाले कर दी, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।