सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकार का अल्टीमेटम: 5 सितंबर तक काम पर लौटने का आदेश, वरना होगी सख्त कार्रवाई
हरियाणा के शहरों में सफाई व्यवस्था चरमराने के बीच राज्य सरकार ने नगर निकायों में जारी सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने एक सख्त आदेश जारी कर 6 अगस्त से काम से अनुपस्थित चल रहे सभी सफाई और सीवर कर्मचारियों को 5 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अपनी ड्यूटी पर लौटने की अंतिम समय सीमा तय कर दी है। विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और जिला नगर आयुक्तों को इन सरकारी निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश जारी किए हैं।
स्वच्छता आवश्यक सेवा घोषित, मशीनरी तोड़ने पर FIR दर्ज
राज्य सरकार ने स्वच्छता प्रबंधन को जनहित से जुड़ी अनिवार्य व आवश्यक सेवा करार देते हुए शहरों में निर्बाध सफाई व्यवस्था बनाए रखने पर सबसे अधिक बल दिया है। शासन की ओर से सामने आए बयानों के मुताबिक हड़ताल के दौरान बड़े पैमाने पर कर्मचारी बिना सूचना के अनुपस्थित रहे हैं। इसके अतिरिक्त विरोध प्रदर्शन की आड़ में सरकारी सफाई उपकरणों और आधुनिक मशीनों को क्षतिग्रस्त करने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं, जिसके चलते तोड़फोड़ करने वाले कई हड़ताली कर्मियों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। 6 अगस्त से जारी इस आंदोलन से कई प्रमुख शहरों में कचरे के विशाल ढेर लग गए हैं, जिसे देखते हुए प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तय सीमा तक काम पर न आने वालों पर विभागीय और कानूनी दोनों स्तरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देकर कड़े एक्शन की तैयारी
नगरीय प्रशासन ने यह सख्त रुख 18 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए न्यायिक आदेशों की पृष्ठभूमि में अपनाया है। आला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अदालती दिशा-निर्देशों और प्रशासनिक फैसलों के आधार पर शहरी क्षेत्रों में सीवरेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बिना किसी बाधा के चालू रखा जाए। सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि आम नागरिकों की सेहत से जुड़े इस मामले में किसी भी तरह की बाधा पैदा करने वाले तत्वों से कानूनन सख्ती से निपटा जाएगा।
सीएम नायब सिंह सैनी का रुख: 12 मांगें मंजूर, पक्के करने पर कानूनी मंथन
इस गतिरोध के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में हरियाणा विधानसभा के पटल पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया था। सीएम सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वच्छता कर्मियों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनकी 12 प्रमुख मांगों को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। वहीं कर्मचारियों को नियमित यानी स्थायी करने की मांग पर मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रक्रिया में कई जटिल वैधानिक पहलू जुड़े हैं, जिनकी कानूनी रूपरेखा के तहत गहन समीक्षा की जा रही है।
विधानसभा से सड़क तक गरमाया सियासी पारा, हुड्डा और विपक्ष का तीखा हमला
सफाई कर्मियों की हड़ताल को लेकर राज्य में सियासी टकराव भी चरम पर पहुंच चुका है। नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की जायज मांगों के प्रति असंवेदनशील और उदासीन होने का खुला आरोप लगाया। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने विरोध के दौरान कर्मियों पर कई स्थानों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा उठाया, जबकि इनेलो (INLD) विधायक आदित्य देवी लाल ने भी सरकार पर कर्मचारियों के साथ अन्याय और उत्पीड़न करने के आरोप जड़े। इससे पूर्व 1 सितंबर को हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में भी विपक्षी विधायकों ने इस संकट को पुरजोर तरीके से उठाते हुए सरकार से तुरंत समाधान निकालने की मांग की थी।