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Up kiran,Digital Desk : पंजाब विधानसभा चुनाव (2027) से पहले राज्य की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की पार्टी में वापसी के लिए जमीन तैयार कर रहा है। कांग्रेस से नवजोत कौर के निष्कासन और उनके द्वारा राहुल गांधी पर किए गए सीधे हमलों ने इस 'घर वापसी' की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

सिद्धू दंपती की 'घर वापसी' का ब्लूप्रिंट

सूत्रों के अनुसार, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सिद्धू दंपती को वापस लाने का मन बना लिया है।

अंतिम फैसला: इसी महीने के अंत तक इस पर मुहर लग सकती है।

राहुल गांधी पर हमला: हाल ही में नवजोत कौर सिद्धू ने राहुल गांधी को 'जमीनी हकीकत से दूर' बताते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि गांधी को पंजाब की असलियत का पता नहीं है और उनके आसपास के लोग ही कांग्रेस को खत्म कर रहे हैं।

पीएम मोदी की तारीफ: एक ओर जहां नवजोत कौर कांग्रेस पर हमलावर हैं, वहीं दूसरी ओर वे सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली की जमकर तारीफ कर रही हैं।

विरोध की गूंज: पार्टी के भीतर आसान नहीं होगी राह

भाजपा नेतृत्व भले ही सिद्धू को वापस लाना चाहता हो, लेकिन पंजाब इकाई में इसके सुर विरोध के भी हैं:

कैप्टन अमरिंदर सिंह: कांग्रेस के समय से ही कैप्टन और सिद्धू की अदावत जगजाहिर है। कैप्टन अब भाजपा में हैं और वे सिद्धू की वापसी के कड़े विरोधी माने जा रहे हैं।

पुराने दिग्गज: पंजाब भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोरंजन कालिया समेत कई पुराने नेता सिद्धू की 'बिन बुलाए मेहमान' वाली एंट्री से खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि सिद्धू के आने से पार्टी का पुराना कैडर नाराज हो सकता है।

नेतृत्व का तर्क: हालांकि, शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि अमरिंदर या रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं के आने से पार्टी को पंजाब में अपेक्षित चुनावी लाभ नहीं मिला, इसलिए सिद्धू जैसा 'क्राउड पुलर' चेहरा भाजपा के लिए पंजाब में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

क्यों अहम है यह सियासी उलटफेर?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: भाजपा पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और उसे एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो आक्रामक हो और जिसकी जनता में पकड़ हो।

सिख चेहरा: सिद्धू एक बड़े सिख चेहरे के रूप में भाजपा की 'पंजाब रणनीति' में फिट बैठते हैं।

कांग्रेस को झटका: अगर सिद्धू भाजपा में जाते हैं, तो यह पंजाब कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान होगा, जो पहले से ही अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है।

सिद्धू का सफर: एक नजर में

2004-2016: भाजपा में रहे, 3 बार अमृतसर से सांसद।

2017-2026: कांग्रेस में शामिल हुए, पंजाब प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री बने।

2026: पत्नी का निष्कासन और भाजपा में वापसी की अटकलें तेज।