60 में 31 सीटें और बिना गठबंधन सत्ता, जानें राजस्थान में यहां AAP ने कैसे रचा नया इतिहास
राजस्थान की स्थानीय राजनीति में सोमवार को एक ऐतिहासिक नया अध्याय जुड़ गया, जब बारां नगर परिषद की कमान आम आदमी पार्टी (AAP) के हाथों में आ गई। पहली बार चुनावी दंगल में उतरीं 34 वर्षीय शीतल राठौर नगर परिषद की नई सभापति निर्वाचित हुई हैं।
वर्ष 2026 के नगर परिषद चुनाव से सक्रिय राजनीति की शुरुआत करने वाली शीतल ने वार्ड संख्या 37 से पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा, शानदार जीत हासिल की और अपनी पहली ही राजनीतिक पारी में सीधे सभापति के प्रतिष्ठित पद तक पहुंचने में कामयाब रहीं।
झालावाड़ में जन्मी और पुलिस विभाग में कार्यरत रहे पिता की बेटी शीतल राठौर ने अंग्रेजी साहित्य (English Literature) में परास्नातक (MA) की डिग्री हासिल की है। वर्ष 2014 में उनका विवाह बारां नगर परिषद के पूर्व सभापति कमल राठौर के साथ हुआ था। दो बच्चों की मां शीतल ने वार्ड 37 से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 305 मतों के बड़े अंतर से हराकर अपनी मजबूत सियासी धमक दर्ज कराई थी।
पति कमल राठौर की रणनीति और AAP का स्पष्ट बहुमत
शीतल राठौर की इस ऐतिहासिक सफलता को उनके पति और बारां नगर परिषद के पूर्व सभापति कमल राठौर के राजनीतिक रसूख से जोड़कर देखा जा रहा है। कमल राठौर ने स्थानीय स्तर पर आम आदमी पार्टी की चुनावी रणनीति और प्रबंधन की पूरी कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कुल 60 वार्डों में प्रत्याशी उतारे और 31 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज कर अपने दम पर पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। चुनावी नतीजों में कांग्रेस 18 सीटों पर सिमट गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी को महज 9 सीटें मिलीं और 2 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। 60 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए जरूरी 31 का आंकड़ा हासिल कर 'आप' ने बिना किसी गठबंधन या जोड़-तोड़ के सीधे बोर्ड बनाने की स्थिति सुनिश्चित कर ली।
कांग्रेस के 15 साल पुराने तिलिस्म का खात्मा
बारां नगर परिषद का यह चुनाव परिणाम कई मायनों में बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चुनावी जीत के साथ ही बारां में पिछले करीब 15 वर्षों से चले आ रहे कांग्रेस के एकाधिकार और बोर्ड का अंत हो गया है। हाड़ौती अंचल की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के पारंपरिक द्विध्रुवीय मुकाबले के बीच आम आदमी पार्टी ने एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज करा दी है, जिसने पूरे प्रदेश के सियासी पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
नामांकन वापसी के बाद त्रिकोणीय मुकाबला, BJP पार्षदों ने बनाई दूरी
सभापति पद के चुनाव की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प रही। आम आदमी पार्टी की तरफ से शुरुआत में शीतल राठौर और चंद्रकला सुमन ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। हालांकि, बाद में चंद्रकला सुमन द्वारा नाम वापस लिए जाने के बाद मुकाबला आम आदमी पार्टी की शीतल राठौर, कांग्रेस की मीनाक्षी भारद्वाज और भाजपा की निलेश जैन के बीच तय हुआ। सोमवार को हुए आधिकारिक मतदान के दौरान पार्षदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया के दौरान भाजपा के पार्षदों के मतदान से दूर रहने की बात भी सामने आई, जिसके बाद संख्याबल के दम पर शीतल राठौर की विजय का औपचारिक ऐलान कर दिया गया।
शहर की बुनियादी समस्याएं और नई सभापति के सामने चुनौतियां
पहली बार में ही सीधे शीर्ष पद पर बैठने वाली शीतल राठौर के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। चुनावी जीत के जश्न के बाद अब उनके सामने नगर परिषद के प्रशासनिक तंत्र को दुरुस्त करने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की असल परीक्षा है। बारां शहर में लंबे समय से चली आ रही सफाई व्यवस्था, सुचारू पेयजल आपूर्ति, खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत, ट्रैफिक जाम से निजात, बरसात के दिनों में जलभराव की रोकथाम और मूलभूत नागरिक सुविधाओं का विस्तार उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। अब पूरे शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पति कमल राठौर के पुराने प्रशासनिक अनुभव और शीतल राठौर के नए दृष्टिकोण का तालमेल बारां के विकास को किस नई दिशा में ले जाता है।