इमरान मसूद के अल्टीमेटम के बाद अखिलेश की रणनीति में बड़ा बदलाव, इकरा हसन को क्यों उतारा आगे?

इमरान मसूद के अल्टीमेटम के बाद अखिलेश की रणनीति में बड़ा बदलाव, इकरा हसन को क्यों उतारा आगे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेता भले ही मंचों पर एकजुटता का संदेश दे रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर सियासी वर्चस्व और सीट शेयरिंग को लेकर शह-मात का खुला खेल शुरू हो चुका है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर मचे अंदरूनी घमासान के बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कांग्रेस के दबाव की राजनीति से निपटने के लिए अपनी पूरी रणनीति बदल दी है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा सपा को दिए जा रहे अल्टीमेटम और तीखे हमलों का जवाब देने के लिए अखिलेश यादव ने बेहद सधे हुए अंदाज में कैराना से सपा की तेजतर्रार युवा सांसद इकरा हसन को सीधे मोर्चे पर उतार दिया है।

इमरान मसूद का सपा को खुला अल्टीमेटम: 'अक्टूबर तक सीटें तय करें वरना अकेले लड़ेंगे'

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सीट शेयरिंग में हो रही देरी को लेकर लगातार समाजवादी पार्टी पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। इमरान मसूद ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अखिलेश यादव की सक्रियता चाहे जितनी भी दिखे, अगर गठबंधन करना है तो सीटों का बंटवारा अक्टूबर तक हर हाल में अंतिम रूप ले लेना चाहिए, अन्यथा कांग्रेस केवल सहारनपुर ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अपने दम पर 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर देगी। मसूद का दावा है कि बीजेपी को शिकस्त देने के लिए राहुल गांधी का नेतृत्व और कांग्रेस पार्टी का साथ होना अपरिहार्य है और यदि गठबंधन में देरी हुई तो इसका सीधा नुकसान जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मसूद के ये तीखे बयान असल में पश्चिम यूपी में कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर बढ़ाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।

'अकेले लड़ना कांग्रेस की भूल होगी', इकरा हसन का तीखा पलटवार

इमरान मसूद के बयानों से असहज होने के बजाय सपा ने जब देखा कि चुप्पी साधने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है, तो कैराना सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर की धरती से ही कांग्रेस को दो-टूक जवाब दिया। इकरा हसन ने बिना लाग-लपेट कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का रथ रोकने की ताकत केवल और केवल अखिलेश यादव में है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को आईना दिखाते हुए स्पष्ट किया कि अगर कांग्रेस अकेले चुनावी मैदान में उतरने का ख्वाब देख रही है, तो यह उसकी सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल साबित होगी। इकरा ने साफ किया कि अगर गठबंधन बना रहता है तो स्वागत है, लेकिन यदि गठबंधन टूटा तो इसका पूरा सियासी नुकसान सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ेगा, सपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

पश्चिम यूपी में 'मुस्लिम बनाम मुस्लिम' चेहरे की नई बिसात

सूत्रों के अनुसार, जब इमरान मसूद ने शुरुआत में सपा पर हमले शुरू किए थे, तब सपा प्रवक्ता राजीव राय ने मोर्चा संभाला था और राहुल गांधी के करीबी नेताओं ने शीर्ष स्तर पर बातचीत कर मामला शांत कराने का भरोसा दिया था। हालांकि, महीनों बीतने के बाद भी जब इमरान मसूद के तीखे हमलों का सिलसिला थमा नहीं, तो अखिलेश यादव ने रणनीतिक चाल चलते हुए खुद या किसी वरिष्ठ नेता से जवाब दिलवाने के बजाय पश्चिम यूपी की ही एक उच्च शिक्षित, युवा और लोकप्रिय मुस्लिम महिला सांसद इकरा हसन को आगे कर दिया। इससे न केवल इमरान मसूद के कद को स्थानीय दायरे में समेटने की रणनीति काम कर गई, बल्कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के कोर मुस्लिम वोट बैंक में सपा ने यह स्पष्ट संदेश भी दे दिया कि पार्टी किसी के दबाव में झुकने वाली नहीं है।