5 बार के पार्षद अब बने उदयपुर के मेयर, जानिए पारस सिंघवी की पूरी कहानी
झीलों की खूबसूरत नगरी उदयपुर से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। नगर निगम महापौर पद के लिए हुए प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबले के नतीजे आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए गए हैं।
मतगणना संपन्न होने के बाद जिला निर्वाचन विभाग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता पारस सिंघवी को उदयपुर का नया महापौर (मेयर) घोषित कर दिया है। 80 पार्षदों वाले नगर निगम बोर्ड में पारस सिंघवी ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को भारी अंतर से पराजित किया।
55 वोटों के साथ एकतरफा मुकाबला, निर्दलीयों का भी मिला साथ
उदयपुर नगर निगम के इस चुनाव में मुकाबला पूरी तरह एकतरफा साबित हुआ। कुल 80 पार्षदों के सदन में भाजपा प्रत्याशी पारस सिंघवी को 55 वोट हासिल हुए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार महज 25 वोटों पर ही सिमट कर रह गए। 80 वार्डों के परिणाम में भाजपा के अपने 53 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के पास 23 और अन्य पार्षद थे। मतदान के दौरान भाजपा के सभी 53 पार्षदों के अलावा 2 निर्दलीय पार्षदों ने भी पारस सिंघवी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग से परे जाकर समर्थन दिया, जिससे जीत का आंकड़ा 55 तक पहुंच गया और भाजपा ने 30 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
जीत के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज, शहर के समग्र विकास का संकल्प
जिला प्रशासन द्वारा जीत का प्रमाण पत्र सौंपे जाते ही नगर निगम परिसर से लेकर भाजपा कार्यालय तक जश्न का माहौल बन गया। नवनिर्वाचित महापौर पारस सिंघवी के समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर आतिशबाजी की और मिठाई बांटकर जीत का उत्सव मनाया। इस अवसर पर पारस सिंघवी ने कहा कि यह विजय उदयपुर की जनता और भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के अटूट भरोसे का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि झीलों के संरक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने और शहर के बुनियादी ढांचे का समग्र विकास उनकी शीर्ष प्राथमिकता रहेगी।
छात्र राजनीति से महापौर तक: 5 बार के पार्षद और पूर्व डिप्टी मेयर
पारस सिंघवी उदयपुर संभाग में भाजपा के सबसे अनुभवी और कद्दावर चेहरों में गिने जाते हैं। छात्रसंघ राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले सिंघवी इस बार पांचवीं बार पार्षद निर्वाचित हुए हैं। वे इससे पहले नगर निगम में उप-महापौर (डिप्टी मेयर) के रूप में भी अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं। स्थानीय व्यापारिक संगठनों और सामाजिक दायरों में उनकी मजबूत पकड़ है। हालिया वार्ड चुनाव में उन्होंने वार्ड नंबर 24 से भारी मतों से जीत दर्ज की थी। सदन में भाजपा के 53 पार्षदों के स्पष्ट बहुमत को देखते हुए उनका मेयर बनना पहले से ही तय माना जा रहा था।
राम मंदिर आंदोलन में लखनऊ से अयोध्या पैदल यात्रा, शीर्ष नेतृत्व से करीबी
10 मई 1964 को जन्मे 62 वर्षीय पारस सिंघवी की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राम जन्मभूमि आंदोलन से गहरे जुड़ी रही है। 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने लखनऊ से अयोध्या तक पैदल यात्रा कर अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराई थी। संगठनात्मक दृष्टि से उन्हें सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर का बेहद करीबी माना जाता है। इसके अलावा, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के साथ भी उनके गहरे और विश्वसनीय संबंध हैं।
होटल-ट्रेवल्स का पुश्तैनी कारोबार, 3.69 करोड़ की संपत्ति
राजनीति के साथ-साथ पारस सिंघवी का एक सफल कारोबारी चेहरा भी है। वे वाणिज्य स्नातक (B.Com) हैं और लंबे समय से होटल एवं टूर-ट्रैवल सेक्टर से जुड़े हैं। उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में 'पारस ट्रैवल्स' के नाम से उनकी लग्जरी बस सेवाएं संचालित होती हैं और उनका अपना 'पारस होटल' भी है। राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपे गए चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 3.69 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति दर्ज है।