यूपी वालों के लिए जरूरी खबर, योगी सरकार ने लागू किए नए सख्त नियम
उत्तर प्रदेश में पैक्ड खाद्य उत्पाद खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव किया गया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) ने प्रदेशभर के सभी खाद्य उत्पादकों, वितरकों और खुदरा कारोबारियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नए आदेश के मुताबिक, अब किसी भी पैक्ड खाद्य सामग्री के पैकेट पर उसके वास्तविक निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) अथवा प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) की सही और सटीक तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस कड़े कदम का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक जब भी कोई डिब्बाबंद उत्पाद खरीदे, तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ पता हो कि खाद्य सामग्री वास्तव में किस दिन तैयार की गई थी।
रीपैकिंग की तारीख को 'निर्माण तिथि' बताना अब गैरकानूनी
विभाग के नए आदेश के अनुसार, केवल उस दिन की तारीख को निर्माण तिथि (Date of Manufacturing) नहीं माना जाएगा, जिस दिन किसी पुराने या थोक में रखे गए खाद्य पदार्थ को छोटे पैकेट्स में भरा गया हो या दोबारा पैक (Re-pack) किया गया हो। दरअसल, हालिया विभागीय छापों और औचक निरीक्षणों के दौरान यह गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया था कि कई कारोबारी महीनों पहले से गोदामों में डंप खाद्य सामग्री को नए पाउच या डिब्बों में भरकर उसी दिन की तारीख को 'मैन्युफैक्चरिंग डेट' के रूप में छाप रहे थे। विभाग ने इस भ्रामक और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तरीके पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
शेल्फ लाइफ और गुणवत्ता की सुरक्षा: ग्राहकों को मिलेगी सटीक जानकारी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने वैज्ञानिक और तकनीकी आधार स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी खाद्य उत्पाद की शेल्फ लाइफ (उपभोग की सुरक्षित अवधि) उसके वास्तविक निर्माण या प्राथमिक प्रसंस्करण के समय से ही प्रभावी होती है। खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सामान्य या असुरक्षित परिस्थितियों में स्टोर करके रखने से उनके पोषक तत्वों में भारी गिरावट आती है और उनमें बैक्टीरिया या फंगस पनपने का खतरा रहता है।
ऐसे में पुराने माल को रीपैक कर उस पर नई तारीख चिपकाने से ग्राहक गुमराह होते हैं और बासी उत्पाद को ताजा समझकर खा लेते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक उम्र की सटीक जानकारी मिल सकेगी।
कारोबारियों के लिए सख्त चेतावनी: रीलेबलिंग का बहाना नहीं चलेगा
खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा जारी किए गए इन निर्देशों के बाद अब रीपैकिंग, रीलेबलिंग या ब्रांडिंग के नाम पर बाद की तारीख को निर्माण तिथि दर्शाना पूरी तरह अस्वीकार्य और दंडनीय अपराध माना जाएगा। विभाग ने राज्य के सभी खाद्य कारोबारियों, निर्माताओं और ट्रेड एसोसिएशन्स को दो टूक निर्देश दिया है कि वे अपनी लेबलिंग प्रणाली में तत्काल सुधार करें। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों, गोदामों और पैकेजिंग यूनिट्स पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI एक्ट) के कड़े प्रावधानों के तहत भारी जुर्माना लगाने और लाइसेंस रद्द करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।