अजमेर से पाली तक कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी हारी; BJP ने निर्दलीयों के दम पर 3 नगर निगमों में रचा इतिहास
राजस्थान के स्थानीय निकाय और नगर निगम महापौर चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबरदस्त चुनावी रणनीति का प्रदर्शन करते हुए विपक्षी कांग्रेस को गहरा झटका दिया है।
अजमेर और पाली नगर निगम में सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद कांग्रेस अपने महापौर नहीं बना सकी। निर्दलीय पार्षदों की निर्णायक लामबंदी और भारी क्रॉस-वोटिंग के सहारे भाजपा ने अजमेर और पाली में बाजी मार ली, जबकि उदयपुर में अपने प्रचंड बहुमत को बरकरार रखते हुए महापौर पद पर कब्जा कर लिया। 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले इन परिणामों को दोनों प्रमुख दलों के लिए एक बड़े लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है।
अजमेर नगर निगम: सभी 11 निर्दलीयों ने थामा BJP का दामन, 43 वोटों से मिली जीत
अजमेर नगर निगम के महापौर चुनाव में सोमवार (21 सितंबर 2026) को बेहद नाटकीय परिणाम सामने आए। 80 वार्डों वाले अजमेर नगर निगम में 14 सितंबर को आए नतीजों के मुताबिक कांग्रेस 37 सीटें जीतकर सबसे आगे थी, जबकि भाजपा के पास 32 और निर्दलीयों के पास 11 सीटें थीं। जादुई आंकड़े से दूर होने के बावजूद भाजपा ने सभी 11 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन अपनी झोली में डाल लिया। मतदान के दौरान भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में 43 वोट पड़े, जिससे पार्टी ने आधिकारिक रूप से महापौर का पद अपने नाम कर लिया, वहीं कांग्रेस अपने 37 पार्षदों के समर्थन तक ही सिमट कर रह गई।
पाली नगर निगम: कांग्रेस में भारी क्रॉस वोटिंग, 29 पार्षद होने पर भी मिले केवल 3 वोट
पाली नगर निगम का मुकाबला सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा, जहां कांग्रेस को भारी राजनीतिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। 65 वार्डों वाले पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था, जबकि भाजपा के पास 21 और निर्दलीयों के पास 15 सीटें थीं। लेकिन महापौर के गुप्त मतदान में कांग्रेस का पूरा समीकरण ध्वस्त हो गया। कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन को 29 पार्षदों के बावजूद महज 3 वोट मिले। वहीं भाजपा उम्मीदवार नमिता बुबाकिया ने 12 अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाकर कुल 33 वोटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राजबाला हिगड़ (29 वोट) को मात्र 4 मतों के अंतर से शिकस्त दी।
उदयपुर नगर निगम: पारस सिंघवी 55 वोटों के साथ बने नए महापौर
उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने अपने तीन दशक पुराने दबदबे को और मजबूत किया है। 14 सितंबर को घोषित परिणामों में भाजपा ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर पहले ही पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था, जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें गई थीं। सोमवार को हुई वोटिंग में भाजपा के वरिष्ठ नेता पारस सिंघवी को 55 वोट मिले, जिसमें भाजपा के 53 पार्षदों के अलावा 2 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी शामिल रहा। कांग्रेस प्रत्याशी मात्र 25 वोटों पर सिमट गए, जिसके बाद जिला निर्वाचन विभाग ने पारस सिंघवी को औपचारिक रूप से उदयपुर का नया मेयर घोषित किया।
2028 विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भाजपा की बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त
राजस्थान की इन तीन प्रमुख नगर निगमों के परिणाम राज्य की सियासत में दूरगामी संदेश दे रहे हैं। कांग्रेस द्वारा जमीनी स्तर पर वार्डों में बढ़त बनाने के बावजूद बोर्ड बनाने में विफलता संगठन की आपसी गुटबाजी और फ्लोर मैनेजमेंट की कमजोरी को उजागर करती है। वहीं सत्ताधारी भाजपा ने न केवल अपने कैडर को एकजुट रखा बल्कि निर्दलीयों और विरोधी खेमे में सेंधमारी कर यह साबित कर दिया कि नगर निकाय स्तर पर उसका चुनावी प्रबंधन कितना आक्रामक और मजबूत है।