37 पार्षदों वाली कांग्रेस कैसे हार गई यहां मेयर चुनाव, 32 से BJP ने छुआ 43 का आंकड़ा
राजस्थान की हाई-प्रोफाइल अजमेर नगर निगम के महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अप्रत्याशित चुनावी समीकरण साधते हुए नगर निगम की सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। 80 वार्डों वाले नगर निगम बोर्ड में 37 पार्षदों की जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद कांग्रेस मेयर की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाने से चूक गई।
सोमवार को संपन्न हुए मतदान और मतगणना में भाजपा की प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवार किरण गढ़वाल को केवल 37 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। 41 के जादुई बहुमत के आंकड़े से महज 4 कदम दूर रहने वाली कांग्रेस की इस अप्रत्याशित हार ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, बाड़ाबंदी और चुनावी रणनीति की कमजोरियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
11 निर्दलीयों का दावा बेअसर, बाड़ाबंदी के बावजूद धरी रह गई रणनीति
महापौर चुनाव की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस खेमा बोर्ड बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा था और पार्टी रणनीतिकारों ने सभी 11 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का खुला दावा किया था। इतना ही नहीं, किसी भी संभावित क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने सभी पार्षदों की बाकायदा रिसॉर्ट में सख्त बाड़ाबंदी भी की थी। इसके विपरीत, भाजपा के पास आधिकारिक तौर पर केवल 32 पार्षद ही निर्वाचित हुए थे। लेकिन जब गुप्त मतदान के नतीजे सामने आए तो हर कोई दंग रह गया। भाजपा उम्मीदवार अनामिका शर्मा को अपने आधिकारिक संख्याबल से 11 अधिक यानी कुल 43 वोट मिले।
गुप्त मतदान प्रणाली के चलते यह सीधे तौर पर तय नहीं हो सका कि किन निर्दलीय पार्षदों या विपक्षी दल के सदस्यों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया, लेकिन इस परिणाम ने साबित कर दिया कि कांग्रेस का जमीनी गणित और निर्दलीयों पर भरोसा पूरी तरह गलत साबित हुआ।
अजमेर कांग्रेस नेतृत्व पर उठे सवाल, मंथन में जुटे दिग्गज
मेयर पद के हाथ से फिसलने के बाद कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह और स्थानीय नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल, देहात जिलाध्यक्ष डॉ. विकास चौधरी और वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राठौड़ की रणनीति को लेकर तीखी चर्चाएं चल रही हैं।
इस चुनाव ने यह संदेश दे दिया है कि केवल पार्षदों को होटल या रिसॉर्ट में कैद करने से जीत हासिल नहीं की जा सकती, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्षदों की नाराजगी को दूर करना और निरंतर संवाद बनाए रखना अधिक जरूरी है। ऐन वक्त पर प्रभावी वोट मैनेजमेंट की इस विफलता के बाद कांग्रेस आलाकमान अब अजमेर नगर निगम चुनाव की विस्तृत समीक्षा करने और भीतरघात करने वालों की पहचान करने की तैयारी में जुट गया है।