SOG का सबसे बड़ा एक्शन; 10 लाख की डील का हुआ पर्दाफाश

SOG का सबसे बड़ा एक्शन; 10 लाख की डील का हुआ पर्दाफाश

राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं के इतिहास में सबसे बड़े काले अध्याय के रूप में दर्ज सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक बार फिर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए ऐसा सनसनीखेज पर्दाफाश किया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। एसओजी की जांच के दायरे में अब एक ऐसा शातिर पारिवारिक और रिश्तेदारी का नेटवर्क आया है, जिसने पूरी परीक्षा व्यवस्था को ही पैसों के दम पर खरीद लिया था। इस ताजा कार्रवाई में एसओजी ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जिसमें पिता-पुत्र और जीजा-साला की जोड़ी मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम दे रही थी। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर बनने के लिए पूरे 10 लाख रुपये की नगद डील फिक्स हुई थी। आइए एक इन्वेस्टिगेटिव क्राइम रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि एसओजी के इस नए एक्शन में क्या-क्या खुलासे हुए हैं और कैसे इस सिंडिकेट की पोल खुली है।

कैसे काम कर रहा था पेपर लीक का यह पारिवारिक और रिश्तेदारी सिंडिकेट?

एसओजी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पेपर लीक रैकेट कोई आम अपराधियों का गिरोह नहीं था, बल्कि इसमें उन लोगों ने अपनी जड़ें जमा रखी थीं जो सिस्टम के भीतर रहकर या बिचौलियों की भूमिका निभाकर युवाओं के भविष्य का सौदा कर रहे थे। ताजा खुलासे के मुताबिक, इस नेटवर्क में एक पिता और उसका बेटा सीधे तौर पर जुड़े हुए थे, जो परीक्षा पास करवाने के नाम पर उम्मीदवारों से संपर्क साधते थे। उनके साथ ही उनके रिश्तेदार यानी जीजा-साला की जोड़ी इस पूरे नेक्सस को मैनेज करती थी। गिरोह का यह तरीका बेहद शातिर था; वे सीधे उन अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को निशाना बनाते थे जो किसी भी कीमत पर सरकारी नौकरी हासिल करना चाहते थे। परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र और उनके सटीक उत्तर रटवाने के लिए यह पूरा पारिवारिक सिंडिकेट सक्रिय हो जाता था और पैसों की लेनदेन की गारंटी खुद यही रिश्तेदार लेते थे ताकि किसी बाहरी व्यक्ति को इसकी भनक न लग सके।

10 लाख की डील और एडवांस भुगतान का खेल आया सामने

एसओजी की पूछताछ और तकनीकी सर्विलांस से यह बात साफ हो गई है कि इस पूरे मामले में बाकायदा फिक्सिंग की गई थी। एक ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर की वर्दी पहनने के एवज में 10 लाख रुपये की डील तय हुई थी। डील के तहत यह तय हुआ था कि परीक्षा से पहले कुछ लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए जाएंगे और बाकी की बची हुई रकम परीक्षा में चयन होने और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दी जाएगी। इस सिंडिकेट के पास से बरामद दस्तावेजों और मोबाइल चैट्स से एसओजी को पुख्ता सबूत मिले हैं कि किस प्रकार बैंक खातों और हवाला के जरिए इन पैसों का आदान-प्रदान किया गया था। जिन युवाओं ने इस शॉर्टकट का रास्ता अपनाया था, उनमें से कई अब एसओजी की गिरफ्त में आ चुके हैं और जेल की हवा खा रहे हैं। एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पारिवारिक नेटवर्क के तार और किन-किन बड़े कोचिंग संचालकों या सरकारी अधिकारियों से जुड़े हुए थे।

SOG की ताबड़तोड़ छापेमारी और गिरफ्तारियों से ट्रेनी एसआई के बीच मचा हड़कंप

जैसे-जैसे एसओजी की जांच का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) और अन्य ट्रेनिंग सेंटर्स में प्रशिक्षण ले रहे कई ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। एसओजी ने पिछले कुछ दिनों में कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश दी है और इस गिरोह से जुड़े मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई ऐसे नाम उगले हैं जो अब तक जांच की पहुंच से बाहर थे। इस कार्रवाई के बाद से पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार और एसओजी का स्पष्ट संदेश है कि पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध में शामिल किसी भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।

युवाओं के सपनों का सौदा और परीक्षा व्यवस्था पर फिर उठते गंभीर सवाल

इस सनसनीखेज खुलासे ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि किस तरह कुछ लालची और भ्रष्ट लोगों ने मेहनत करने वाले लाखों ईमानदार युवाओं के सपनों का गला घोंट दिया है। दिन-रात लाइब्रेरी की चारदीवारी में बैठकर अपनी जवानी और आंखें खपाने वाले छात्र जब यह देखते हैं कि मात्र 10 लाख रुपये और पारिवारिक सिफारिश के दम पर अयोग्य लोग वर्दी पहनकर थानों में बैठ रहे हैं, तो उनका व्यवस्था से भरोसा उठने लगता है। एसओजी की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है और यह इस बात का प्रतीक है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। लेकिन जब तक इस नापाक नेक्सस को जड़ से खत्म नहीं किया जाता और ऐसे दागी अधिकारियों को बर्खास्त कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की परिकल्पना अधूरी ही रहेगी।