15 जुलाई तक का समय... वरना फूंक दिया जाएगा शिक्षा मंत्री का पुतला! राजस्थान में शिक्षकों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
राजस्थान में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर हुए स्थानांतरण को लेकर शिक्षक संघ (एसटीएफआई) ने मोर्चा खोल दिया है। पारदर्शिता की कमी और पक्षपात के आरोपों के बीच 15 जुलाई तक आदेश निरस्त न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
राजस्थान के शिक्षा विभाग में हाल ही में हुए प्राध्यापकों और द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के बड़े पैमाने पर तबादलों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार के इस कदम के खिलाफ राजस्थान शिक्षक संघ (एसटीएफआई) ने पूरी तरह से विरोध का बिगुल फूंक दिया है। संगठन ने इन प्रशासनिक बदलावों को पूरी तरह से गैर-पारदर्शी, अनैतिक और भेदभाव से प्रेरित बताया है। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के बिना किसी ठोस आधार के किए गए फैसले सीधे तौर पर उनके अधिकारों का हनन हैं।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा गया मांग पत्र
इस प्रशासनिक फेरबदल के विरोध में पाल देवल उपशाखा के ब्लॉक अध्यक्ष केशव कोटेड की अगुवाई में शिक्षकों का एक बड़ा दल स्थानीय तहसीलदार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को संबोधित एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। संगठन ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 जुलाई तक इन विवादित तबादला आदेशों की समीक्षा करके इन्हें तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो जिला मुख्यालय पर शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका जाएगा और इस आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
पारदर्शिता के दावों पर उठे गंभीर सवाल
एसटीएफआई के जिला उपाध्यक्ष नारायण लाल कोटेड और ब्लॉक उपाध्यक्ष शंकर कोटेड ने वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षा विभाग की नई सूचियों में निष्पक्षता का पूरी तरह अभाव है। धरातल पर पूरी निष्ठा से काम कर रहे कई शिक्षकों का ट्रांसफर बिना किसी तार्किक या न्यायसंगत वजह के कर दिया गया है। इस मनमानी के कारण आम शिक्षकों के बीच भारी नाराजगी और असंतोष का माहौल बन गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी होने पर वे चुप नहीं बैठेंगे और चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।