अब ऐसे नहीं मिलेगा भारी वाहनों का ड्राइविंग लाइसेंस! राजस्थान सरकार ने बदले नियम
राजस्थान के परिवहन विभाग और राज्य सरकार ने सड़क सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आए दिन होने वाले भीषण सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए एक बहुत ही कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब भारी वाहनों (Heavy Motor Vehicles - HMV) जैसे कि ट्रक, बस, ट्रेलर और अन्य कमर्शियल वाहनों का ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना पहले की तरह बिल्कुल आसान नहीं रह गया है। राज्य सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस (DL) जारी करने की पूरी प्रक्रिया और नियमों में व्यापक संशोधन कर दिए हैं, जिन्हें पूरे प्रदेश में कड़ाई से लागू किया जा रहा है। नए नियमों के तहत अब किसी भी आवेदक को भारी वाहन का लाइसेंस पाने के लिए केवल औपचारिकताएं पूरी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसे बेहद कठिन ड्राइविंग टेस्ट, अनिवार्य प्रशिक्षण और सख्त चिकित्सीय परीक्षण (Medical Test) के कड़े चरणों से गुजरना होगा। सरकार का यह मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़कों पर केवल वही चालक भारी वाहन लेकर उतरें जो पूरी तरह से प्रशिक्षित, मानसिक रूप से संतुलित और यातायात नियमों के प्रति पूरी तरह से सजग हों, ताकि बेपरवाह ड्राइविंग के कारण मासूम लोगों की जिंदगियां न छिन सकें।
सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सरकार का बड़ा नीतिगत बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान की सड़कों पर जिस प्रकार से तेज रफ्तार और भारी वाहनों की लापरवाही के कारण सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर की तरफ बढ़ा है, उसने चिंताजनक रूप से सरकार और यातायात विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अधिकांश सड़क हादसों की मुख्य वजह चालकों का अनुभवहीन होना, अत्यधिक थकान या नियमों की पूरी जानकारी न होना पाई गई है। इन तमाम पहलुओं को गहराई से ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने वाहन चालन अनुज्ञा पत्र (Driving License) नियमावली में यह बड़े बदलाव किए हैं। अब तक ऐसा देखा जाता था कि कई लोग बिना उचित ड्राइविंग अनुभव के या केवल कागजी औपचारिकताओं और हल्की-फुल्की जांच के आधार पर भारी वाहनों के लाइसेंस हासिल कर लेते थे, जो बाद में हाइवे पर बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनते थे। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद से अकुशल और फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवाने वाले लोगों की राह में बहुत बड़ी कानूनी दीवार खड़ी हो गई है।
ड्राइविंग टेस्ट और ट्रेनिंग के नियमों में किए गए भारी फेरबदल
नए संशोधनों के अनुसार, अब किसी भी आवेदक को भारी वाहन (एचएमवी) श्रेणी का लाइसेंस तभी जारी किया जाएगा जब वह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी आधिकारिक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से विधिवत रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका होगा। केवल सादे हल्के वाहनों का अनुभव होने मात्र से सीधे भारी वाहन का लाइसेंस नहीं मिल सकेगा। इसके लिए आवेदक को कम से कम एक निर्धारित अवधि तक हल्के वाहन चलाने का पुराना अनुभव दिखाना होगा और उसके बाद हेवी व्हीकल की विशेष ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसके अलावा, प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (RTO) और जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के ट्रैक पर होने वाला ड्राइविंग टेस्ट अब पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और ऑटोमेटेड सेंसर आधारित कर दिया गया है। टेस्ट के दौरान ढलान पर वाहन चलाना, बैक करना, रिवर्स पार्किंग करना और संकरे रास्तों पर नियंत्रण रखना जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें जरा सी भी चूक होने पर आवेदक तुरंत फेल मान लिया जाएगा।
अनिवार्य मेडिकल फिटनेस और दस्तावेजों की सघन जांच प्रक्रिया
भारी वाहनों की ड्राइविंग एक बहुत ही जिम्मेदारी भरा और थका देने वाला कार्य होता है, जिसमें चालक की शारीरिक और मानसिक फिटनेस का उत्तम होना सबसे पहली शर्त मानी जाती है। राजस्थान सरकार के नए नियमों के अंतर्गत अब भारी वाहन का लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले हर आवेदक को एक संपूर्ण मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जांच सरकारी पैनल के डॉक्टरों द्वारा की जाएगी। इसमें खास तौर पर दृष्टि परीक्षण (Vision Test), रक्तचाप (Blood Pressure), मधुमेह और मानसिक सतर्कता की गहन जांच शामिल होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चालक वाहन चलाते समय किसी भी प्रकार की चिकित्सीय समस्या से ग्रसित न हो। इसके साथ ही, आवेदक की आयु सीमा और उसके पिछले ड्राइविंग रिकॉर्ड की भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बारीकी से छंटनी की जाएगी। यदि किसी आवेदक के खिलाफ पूर्व में लापरवाही से गाड़ी चलाने या यातायात नियमों के उल्लंघन के गंभीर मामले दर्ज हैं, तो उसके आवेदन को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया जाएगा।
आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स की प्रतिक्रिया, सड़क सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर
सरकार के इस कड़े फैसले का स्वागत करते हुए आम जनता, सड़क सुरक्षा संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इसे एक बहुत ही सराहनीय कदम बताया है। लोगों का कहना है कि यदि चालकों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू से ही इतनी सख्त और पारदर्शी रखी जाए, तो सड़कों पर होने वाली अराजकता और हादसों में भारी कमी लाई जा सकती है। हालांकि, कुछ स्थानीय ट्रांसपोर्ट संघों और चालकों का यह भी मानना है कि प्रक्रिया के कठिन होने से नए ड्राइवरों को थोड़ा अधिक समय लग सकता है, लेकिन अंततः यह नियम सभी की सुरक्षा के हित में ही है। परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमों का पालन करवाने में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस प्रकार, राजस्थान सरकार के ये नए डीएल नियम आने वाले समय में सड़क परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और अनुशासित बनाने में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाले हैं।