शारदीय नवरात्रि पर घर पर ऐसे करें विधि-विधान से हवन

शारदीय नवरात्रि पर घर पर ऐसे करें विधि-विधान से हवन

सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना का सबसे पवित्र, ऊर्जावान और मांगलिक समय माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महाअनुष्ठान का समापन और इसकी पूर्णता अष्टमी या नवमी तिथि के दिन होने वाले हवन के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हवन एक ऐसा शक्तिशाली माध्यम है जिसके जरिए हमारी प्रार्थनाएं, पूजा और आहुतियां सीधे देवी-देवताओं तक सूक्ष्म रूप से पहुंचती हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर यदि आप भी अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि, शांति, स्वास्थ्य और बाधाओं के निवारण के लिए घर पर ही विधि-विधान से हवन करने की योजना बना रहे हैं, तो इसकी सही प्रक्रिया, सामग्री और मंत्रों की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि आपकी पूजा का पूर्ण और सार्थक फल प्राप्त हो सके।

घर पर हवन करने की तैयारी और आवश्यक सामग्री की पूरी सूची

घर पर हवन करने से पहले सभी आवश्यक पूजन सामग्रियों को एक जगह व्यवस्थित कर लेना चाहिए ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या बाधा न आए। हवन के लिए मुख्य रूप से एक पवित्र हवन कुंड (तांबे, पीतल या लोहे का), आम की लकड़ी या उसकी सूखी समिधियां, गाय का शुद्ध घी, उच्च कोटि की हवन सामग्री (जिसमें काले तिल, जौ, चावल, गुग्गुल, लोबान, कपूर, इलायची, लौंग, मखाने और सूखे मेवे शामिल हों), कलावा, पान का पत्ता, सुपारी, मौसमी फल, और पूर्णाहुति के लिए लाल वस्त्र या कलावा जरूरी होता है। इसके अलावा मां दुर्गा को अर्पित करने के लिए चुनरी, श्रृंगार का सामान और मिठाई की व्यवस्था भी कर लेनी चाहिए। हवन कुंड को स्थापित करने से पहले उसे गंगाजल से अच्छी तरह पवित्र कर लें और उसके चारों तरफ मौली (कलावा) बांधकर रोली व कुमकुम से शुभ स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाएं।

हवन कुंड की स्थापना और पूजन की चरणबद्ध प्रक्रिया

हवन की शुरुआत करने से पहले घर के मंदिर या हवन स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। हवन कुंड को हमेशा घर के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है। सबसे पहले हवन कुंड में आम की सूखी लकड़ियां और कपूर रखकर उन्हें प्रज्वलित करें, ताकि अग्नि स्थिर और शांत रूप से जले। जब अग्नि अच्छी तरह प्रज्वलित हो जाए, तो सबसे पहले भगवान गणेश, कुलदेवता और नवग्रहों के नाम से घी और हवन सामग्री की छोटी-छोटी आहुतियां दी जाती हैं। इसके बाद मुख्य रूप से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनके शस्त्रों और उनकी शक्तियों का आह्वान करते हुए आहुति का क्रम शुरू किया जाता है। वैदिक परंपरा में अग्नि देव को सभी देवताओं का मुख कहा जाता है, इसलिए अग्नि में दी गई प्रत्येक आहुति सीधे संबंधित देवी-देवता तक पहुंचती है।

मां दुर्गा को प्रसन्न करने वाले सबसे शक्तिशाली हवन मंत्र

हवन के दौरान मंत्रों का उच्चारण बहुत ही स्पष्ट, सस्वर और पूरी श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए। नवरात्रि के हवन में सबसे प्रमुख और प्रभावशाली मंत्र मां दुर्गा का नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै स्वाहा' माना जाता है। इस मंत्र की कम से कम 108 बार या अपनी श्रद्धा के अनुसार आहुतियां दी जाती हैं। इसके अलावा 'ॐ दुर्गाय नमः', 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' और 'ॐ महाकालिकायै नमः' का उच्चारण करते हुए भी शुद्ध घी और सुगंधित हवन सामग्री अर्पित की जाती है। प्रत्येक मंत्र के अंत में 'स्वाहा' शब्द का उच्चारण करते ही हाथ से थोड़ी सी सामग्री अग्नि में छोड़ी जाती है। मंत्रों के सही और पवित्र उच्चारण से न केवल हवन की दिव्यता बढ़ती है, बल्कि पूरे घर का वातावरण नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त होकर सकारात्मकता और दिव्य स्पंदनों से भर जाता है।

कन्या पूजन, पूर्णाहुति और हवन का समापन कैसे करें?

हवन की पूर्णता के लिए अंतिम आहुति यानी पूर्णाहुति का विशेष और अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान होता है। जब सभी मंत्रों की निर्धारित आहुतियां समाप्त हो जाएं, तब एक साबुत सूखे नारियल (गोला) को ऊपर से काटकर उसमें बुरादा, मखाने, सूखे मेवे और शुद्ध घी भरकर उसे हवन कुंड के ठीक बीचों-बीच रख दिया जाता है और उस पर लाल कलावा लपेटा जाता है। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर कपूर जलाकर विधि-विधान से मां दुर्गा की भव्य आरती करते हैं और हवन की परिक्रमा करते हैं। अंत में अग्नि के शांत होने के बाद बची हुई पवित्र भभूत (विभूति) को बड़े आदर के साथ अपने और परिवार के सभी सदस्यों के माथे पर लगाया जाता है, जिसे बहुत ही मंगलकारी माना जाता है। इस प्रकार पूरी श्रद्धा, नियमों और शुचिता के साथ किया गया हवन मां दुर्गा को अतिप्रिय होता है और साधक के जीवन के सभी संकट दूर होकर अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।