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Up kiran,Digital Desk : सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) मार्च 2026 में मामूली रूप से बढ़कर 3.40% पर पहुंच गई है। फरवरी में यह आंकड़ा 3.21% था। हालांकि महंगाई में यह मामूली उछाल दर्ज किया गया है, लेकिन राहत की बात यह है कि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के सुविधाजनक लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महंगाई का अंतर

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि शहरों की तुलना में गांवों में महंगाई का दबाव थोड़ा अधिक है:

ग्रामीण महंगाई दर: 3.63%

शहरी महंगाई दर: 3.11%

ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से हो रही वृद्धि इस अंतर का मुख्य कारण मानी जा रही है।

खाद्य महंगाई में उछाल, लेकिन सब्जियों ने दी राहत

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) मार्च में बढ़कर 3.87% हो गया, जो फरवरी में 3.47% था।

इन वस्तुओं के दाम घटे (राहत):

सब्जियां: आलू और प्याज जैसी रसोई की बुनियादी वस्तुओं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

दालें: अरहर (तुअर) दाल, लहसुन और मटर जैसी वस्तुओं में 'नकारात्मक महंगाई' देखी गई, यानी इनके दाम पिछले साल के मुकाबले कम हुए हैं।

इन वस्तुओं ने बढ़ाया दबाव:

नारियल, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में उच्च महंगाई देखी गई है।

आवास (Housing): आवास क्षेत्र में महंगाई दर 2.11% के निचले स्तर पर रही, जिससे शहरी किराएदारों को बड़ी राहत मिली है।

आभूषणों की चमक पड़ी महंगी

खाद्य पदार्थों से इतर, आभूषणों के बाजार में महंगाई का तगड़ा असर देखने को मिल रहा है:

सोना, हीरा और प्लेटिनम: इन कीमती धातुओं के आभूषणों की कीमतों में मजबूत वृद्धि जारी है।

चांदी: फरवरी के मुकाबले चांदी के आभूषणों में मामूली नरमी जरूर आई है, लेकिन यह अब भी ऊंचे स्तर पर है।

आगे का रास्ता: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

महंगाई के ये आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए मिली-जुली स्थिति पेश करते हैं। मुख्य महंगाई दर (Core Inflation) के नियंत्रण में होने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था का व्यापक दृष्टिकोण स्थिर लग रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के तनाव को देखते हुए आरबीआई 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की नीति अपना सकता है, जिससे सस्ती ईएमआई (EMI) का इंतजार थोड़ा लंबा हो सकता है।