Up kiran,Digital Desk : आजकल टेक्नोलॉजी जितनी मददगार हो रही है, उतनी ही डरावनी भी साबित हो रही है, खास तौर पर 'डीपफेक' (Deepfake) के मामले में। इस बार इस काली तकनीक का शिकार हुए हैं बॉलीवुड के सुपरस्टार अजय देवगन। लेकिन उन्होंने चुप रहने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाया, जिस पर अब दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
मामला क्या है?
अजय देवगन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर कुछ शरारती तत्वों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल करते हुए उनके चेहरे को अश्लील और आपत्तिजनक (pornographic) वीडियो में लगा दिया है। उनके वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि इंटरनेट पर ऐसे सैकड़ों वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें अजय देवगन का चेहरा किसी और के शरीर पर लगाकर उनकी इज्जत उछालने की कोशिश की जा रही है।
कोर्ट ने क्या कहा? (एक्शन मोड में हाईकोर्ट)
जस्टिस जसमीत सिंह ने मामले की गंभीरता को तुरंत समझा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डीपफेक का यह खेल न सिर्फ किसी की गरिमा (Dignity) पर हमला है, बल्कि यह एक गंभीर साइबर अपराध भी है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
- तत्काल सफाई: इंटरनेट पर मौजूद अजय देवगन के ऐसे सभी डीपफेक वीडियो को अगले 24 घंटे के अंदर हटा दिया जाए। यह आदेश सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए है।
- दोषियों की तलाश: आईटी मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत उन लोगों की पहचान करें जो यह वीडियो बना और फैला रहे हैं, और उन पर कड़ी कार्रवाई करें।
- कंपनियों को नोटिस: गूगल (YouTube), मेटा (Facebook/Instagram), एक्स (Twitter) और अन्य कंपनियों को नोटिस भेजा गया है। उन्हें दो हफ्ते के अंदर अपना जवाब देना होगा।
अदालत का मानना है कि तकनीक का दुरुपयोग किसी की निजता पर डाका डालने जैसा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 दिसंबर को होगी, जहां सोशल मीडिया कंपनियों को यह बताना होगा कि उन्होंने कोर्ट के आदेश का कितना पालन किया है।
यह घटना बताती है कि डिजिटल दुनिया में कोई भी सुरक्षित नहीं है, लेकिन सही समय पर लिया गया कानूनी एक्शन लगाम लगा सकता है।
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