Up kiran,Digital Desk : कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी के बीच वर्षों से चल रहा तनाव अब खत्म हो गया है। 29 जनवरी को दिल्ली में थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात के बाद उन सभी अटकलों पर विराम लग गया, जिसमें उनकी पार्टी बदलने की खबरें उड़ रही थीं।
भाजपा समर्थक कहे जाने वाले बयान पर खुलासा
दिल्ली से तिरुवनंतपुरम लौटते ही थरूर ने मीडिया से बातचीत की और कहा कि कुछ मुद्दों पर उनके विचारों को मीडिया ने भाजपा समर्थक के रूप में पेश किया, जबकि उनका मकसद हमेशा भारत समर्थक और सरकार समर्थक दृष्टिकोण रखना रहा। थरूर ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पार्टी को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि देशहित को प्राथमिकता देना था।
देश की हित में बोलना पसंद
थरूर ने कहा, “मैं हमेशा यह मानता हूं कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मामलों पर राजनीति करने के बजाय देश के हित में बोलना ज्यादा जरूरी है। यह कोई नई बात नहीं है, मैंने हमेशा यही कहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि उनके विचार कभी भी पार्टी विरोधी नहीं थे, बल्कि कभी-कभी उनकी टिप्पणियां पार्टी के रूख से अलग समझी गईं।
विवादित बयान और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद थरूर के कूटनीतिक दृष्टिकोण पर विवाद पैदा हो गया था। उनकी टिप्पणियों को कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पार्टी लाइन के खिलाफ माना और उनके इरादों पर सवाल उठाए। हालांकि थरूर ने स्वीकार किया कि पार्टी के सदस्य को पार्टी लाइन के खिलाफ नहीं जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि देशहित में विचार व्यक्त करना उनका अधिकार है।
पार्टी में विश्वास और भविष्य
बैठक के बाद थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति विश्वास जताया और कहा कि अब पार्टी में उनके लिए कोई अवरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वह हमेशा देशहित और पार्टी की नीतियों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए अपनी राय रखेंगे।




