CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का खाता खुला, पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने जीता मेडल

CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का खाता खुला, पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने जीता मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG 2026) में भारत का पदक तालिका में आखिरकार खाता खुल गया है। पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा के पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में भारतीय पैरा एथलीट झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए पहला कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम किया।

72.4 किग्रा वर्ग में 190 किग्रा भार उठाकर जमाया कांस्य पर कब्जा

72.4 किलोग्राम भार वर्ग के इस मुकाबले में 28 वर्षीय झंडू कुमार ने अपनी ताकत और स्टेमिना का लोहा मनवाया। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम भार सफलतापूर्वक उठाकर 130.9 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

हालांकि, अपने तीसरे और अंतिम प्रयास में वह 196 किलोग्राम का भार उठाने से बाल-बाल चूक गए। लंबे समय तक बढ़त बनाए रखने के बावजूद अंततः उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

पोलियो और आर्थिक तंगी को पछाड़कर बनाई खास पहचान

झंडू कुमार की यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी कड़ी मेहनत और अटूट जज्बे की मिसाल है। बचपन में पोलियो की बीमारी और कई गंभीर आर्थिक तंगियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज राष्ट्रमंडल खेलों के मंच पर तिरंगा लहराया।

'लक्ष्य स्वर्ण का था, गणना में हुई चूक': कोच राजिंदर सिंह राहेलू

कांस्य पदक जीतने के बाद झंडू कुमार के कोच और दिग्गज पैरा एथलीट राजिंदर सिंह राहेलू ने एएनआई (ANI) से बातचीत में खुशी जताई, लेकिन साथ ही स्वर्ण पदक चूकने का अफसोस भी जताया।

कोच राहेलू ने कहा, "भारत का खाता खोलना बहुत खुशी की बात है। हमने स्वर्ण पदक का लक्ष्य तय किया था और पूरी गणित लगा ली थी, लेकिन मुकाबले के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया और गणना (Calculations) में थोड़ी सी गलतफहमी हो गई। पदक महज दो अंकों (लगभग 2-3 किलोग्राम) के अंतर से स्वर्ण से कांस्य में बदल गया। फिर भी, देश के लिए पहला पदक आना बेहद गर्व की बात है।"

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