सेलेक्टर्स की अनदेखी बनी वजह? मोहम्मद शमी के टेस्ट रिटायरमेंट पर बचपन के कोच का बड़ा बयान

सेलेक्टर्स की अनदेखी बनी वजह? मोहम्मद शमी के टेस्ट रिटायरमेंट पर बचपन के कोच का बड़ा बयान

भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज और अपनी खतरनाक सीम पोजीशन के लिए दुनियाभर में ख्याति प्राप्त करने वाले तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) इन दिनों खेल के गलियारों में एक बहुत बड़े फैसले को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। जब से शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने या इस फॉर्मेट को अलविदा कहने की खबरें सामने आई हैं, तब से देश भर के क्रिकेट प्रेमियों और खेल विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है कि आखिर इस शानदार गेंदबाज को ऐसा कठोर कदम क्यों उठाना पड़ा। इस बीच, मोहम्मद शमी के बचपन के कोच का एक बहुत बड़ा और विस्फोटक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर चयनकर्ताओं (Selectors) की कार्यप्रणाली और उनकी अनदेखी को इस बड़े फैसले की मुख्य वजह बताया है। कोच के इस खुलासे के बाद से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और चयन समिति की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े होने शुरू हो गए हैं। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से चर्चा कर रहे हैं कि आखिर शमी के कोच ने क्या कुछ कहा है और भारतीय क्रिकेट के इस मझे हुए तेज गेंदबाज के टेस्ट करियर को लेकर क्या नए समीकरण सामने आ रहे हैं।

क्या चयनकर्ताओं की लगातार अनदेखी और फिटनेस नजरअंदाज करने से आहत थे शमी?

मोहम्मद शमी ने भारतीय टेस्ट टीम के लिए कई ऐतिहासिक जीत दर्ज की हैं, चाहे वह विदेशी धरती पर SENA देशों (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) में कहर बरपाना हो या घरेलू पिचों पर अपनी धारदार गेंदबाजी से बल्लेबाजों के परखच्चे उड़ाना हो, उनका रिकॉर्ड बेजोड़ रहा है। पिछले कुछ समय से चोट के कारण मैदान से बाहर रहने और फिर पूरी तरह फिट होने के बावजूद उन्हें टीम में बार-बार नजरअंदाज किए जाने की चर्चाएं लगातार आम थीं। उनके बचपन के कोच ने मीडिया से बातचीत करते हुए खुलकर इस बात का जिक्र किया है कि जब एक खिलाड़ी अपनी फिटनेस हासिल करने के बाद भी लगातार उपेक्षा का शिकार होता है और उसे चयन प्रक्रिया में उचित प्राथमिकता नहीं मिलती, तो उसका मानसिक रूप से आहत होना स्वाभाविक है। कोच का मानना है कि शमी जैसे मैच विनर गेंदबाज को जिस सम्मान और निरंतरता के साथ टीम में होना चाहिए था, वह चयनकर्ताओं की तरफ से नहीं मिला, जिसके चलते उन्होंने टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे फॉर्मेट से दूरी बनाने का यह दर्दनाक फैसला लेने का मन बनाया।

बचपन के कोच का बड़ा खुलासा: कड़ी मेहनत के बाद भी नहीं मिला उचित सम्मान

मोहम्मद शमी को फर्श से अर्श तक पहुंचाने में उनके शुरुआती कोचों की मेहनत का बहुत बड़ा योगदान रहा है, और यही वजह है कि जब कोच ने शमी के इस संभावित संन्यास पर अपनी चुप्पी तोड़ी, तो उनके शब्दों में चयन व्यवस्था के प्रति गहरा दर्द साफ झलकता हुआ दिखाई दिया। कोच ने बताया कि शमी ने अपनी फिटनेस और गेंदबाजी पर लौटने के लिए नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में जी-तोड़ मेहनत की थी, और घरेलू तथा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित भी की थी। इसके बावजूद, उन्हें लगातार चयन बैठकों में दरकिनार किया जाना और युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने के नाम पर वरिष्ठ और अनुभवी खिलाड़ियों के योगदान को कम आंकना एक बड़ा अन्याय है। कोच के अनुसार, शमी अभी भी देश के लिए टेस्ट क्रिकेट में कई साल और शानदार सेवाएं दे सकते थे, लेकिन जिस प्रकार का माहौल चयन स्तर पर बनाया गया, उसने इस तेज गेंदबाज को अंदर से झकझोर कर रख दिया।

भारतीय टेस्ट गेंदबाजी आक्रमण पर पड़ेगा असर, फैंस में भी दिख रही है गहरी निराशा

मोहम्मद शमी के टेस्ट करियर के इस मोड़ पर पहुंचने से भारतीय टेस्ट टीम के गेंदबाजी संतुलन पर भी गहरा असर पड़ना तय है। जसप्रीत बुमराह के साथ मिलकर जिस घातक गेंदबाजी जोड़ी ने भारत को विदेशों में कई टेस्ट मैच जिताए थे, उसमें शमी की कमी को आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता। जब से उनके बचपन के कोच का यह बयान सामने आया है, सोशल मीडिया पर क्रिकेट फैंस लगातार बीसीसीआई और चयनकर्ताओं की आलोचना कर रहे हैं। फैंस का कहना है कि दिग्गजों के साथ इस तरह का बर्ताव भारतीय क्रिकेट की संस्कृति के अनुकूल नहीं है। क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि चयनकर्ताओं को आपसी संवाद और पारदर्शिता के साथ मामलों को संभालना चाहिए था ताकि देश को एक बेहतरीन मैच विनर खिलाड़ी की सेवाएं इस तरह समय से पहले न गंवानी पड़ें।