मनु भाकर की दादी का निधन, 84 साल की उम्र में ली आखिरी सांस, टूट गईं ओलंपिक मेडलिस्ट
भारतीय खेल जगत और शूटिंग रेंज से इस समय देश के लिए एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने खेल प्रेमियों की आंखें नम कर दी हैं। ओलंपिक जैसे प्रतिष्ठित मंच पर भारत के लिए दोहरी पदक जीतकर इतिहास रचने वाली देश की स्टार और युवा निशानेबाज मनु भाकर के परिवार से एक बुरी खबर आई है, जहां उनकी दादी का निधन हो गया है। 84 वर्ष की लंबी आयु पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, जिससे मनु भाकर और उनके पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खेल के मैदान पर देश का सिर गर्व से ऊंचा करने वाली मनु भाकर अपनी दादी के बेहद करीब थीं, और इस अपूरणीय क्षति के बाद से पूरी खेल बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है। इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि कैसे इस दुखद घड़ी ने पूरे परिवार और उनके पैतृक गांव को गमगीन कर दिया है।
परिवार की सबसे बड़ी प्रेरणा और आशीर्वाद का साया उठा
जीवन में हर सफल इंसान के पीछे उसके परिवार के बुजुर्गों का त्याग और उनका आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत होता है, और मनु भाकर के लिए उनकी दादी किसी मार्गदर्शक से कम नहीं थीं। जब भी मनु भाकर अपने कड़े अभ्यास सत्रों, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के भारी दबाव या शूटिंग रेंज की चुनौतियों से जूझती थीं, तो उनकी दादी हमेशा उन्हें संबल देती थीं। एक साधारण और सुसंस्कृत परिवार में पली-बढ़ी मनु ने अपनी दादी से ही जीवन के कड़े अनुशासन, संघर्ष और कभी हार न मानने वाले जज्बे की अनमोल सीख ली थी। 84 वर्ष की उम्र में उनका इस दुनिया से चले जाना परिवार के लिए एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता, और मनु भाकर इस व्यक्तिगत क्षति के बाद से बेहद टूट गई हैं।
ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर पर टूटा दुखों का पहाड़, खेल जगत में शोक की लहर
जैसे ही मनु भाकर और उनके परिजनों तक उनकी दादी के निधन की यह मनहूस खबर पहुंची, पूरे घर में कोहराम मच गया और खेल जगत के तमाम दिग्गजों ने भी इस क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से देश के खेल प्रेमियों, खेल महासंघों के अधिकारियों और तमाम बड़ी हस्तियों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। जब कोई खिलाड़ी देश के लिए मेडल जीतता है, तो उसमें उसके परिवार के हर सदस्य का योगदान होता है, और दादी का यूं अचानक चले जाना मनु के लिए एक बहुत बड़ा आघात है। देश की यह चैंपियन बेटी इस समय अपने परिवार के साथ इस कठिन दौर से गुजर रही है, और उनके तमाम प्रशंसक यही दुआ कर रहे हैं कि उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति मिले।
पैतृक गांव में गमगीन माहौल, पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ अंतिम संस्कार
मनु भाकर की दादी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में पूरी पारिवारिक और पारंपरिक मर्यादा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें उनके करीबी रिश्तेदारों और गांव के कई गणमान्य लोग शामिल हुए। इस दुखद अवसर पर पूरा गांव गमगीन नजर आया और हर किसी की आंखें नम थीं, क्योंकि परिवार की इस वरिष्ठ सदस्य ने सभी को हमेशा स्नेह और अपनापन दिया था। स्थानीय प्रशासन और खेल प्रेमियों ने भी शोक यात्रा में शामिल होकर दिवंगत आत्मा को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को ढांढस बंधाया। खेल के मैदान पर देश के लिए लड़ने वाली हमारी इस स्टार बेटी के लिए यह समय व्यक्तिगत रूप से सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है, जिससे पूरा देश पूरी सहानुभूति के साथ जुड़ा हुआ है।
कठिन समय से उबरकर फिर से देश के लिए मैदान पर लौटने का हौसला जुटाएंगी मनु
जीवन में खेल और सफलता अपनी जगह हैं, लेकिन अपनों का बिछड़ना एक ऐसा गहरा घाव है जो समय के साथ ही भर पाता है, और ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर को भी इस सदमे से उबरने के लिए वक्त की जरूरत है। देश भर के करोड़ों खेल प्रेमी यही प्रार्थना कर रहे हैं कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और मनु भाकर तथा उनके पूरे परिवार को इस दुखद घड़ी में संबल प्रदान करे। अपनी दादी के आशीर्वाद और उनकी यादों को अपने दिल में संजोकर मनु भाकर आने वाले समय में एक बार फिर से शूटिंग रेंज पर लौटेंगी और देश के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करके अपनी दादी को सच्ची श्रद्धांजलि देंगी।