तेंदुलकर का दशकों पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त, वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास
कहते हैं कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई पल आए हैं जब नौजवानों ने अपने बल्ले के दम पर दुनिया को हैरान किया है। लेकिन हाल ही में जो देखने को मिला, उसने क्रिकेट जगत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 15 साल की उम्र में जहां ज्यादातर बच्चे अपनी पढ़ाई और स्कूल क्रिकेट में व्यस्त रहते हैं, वहीं एक लड़के ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर आकर ऐसा धमाल मचाया कि रिकॉर्ड बुक्स के पन्ने बदल गए।
हम बात कर रहे हैं वैभव सूर्यवंशी की। इंग्लैंड की कठिन पिचों पर जब उन्होंने अपना सफर शुरू किया था, तो शुरुआती कुछ पारियों में बल्ला शांत रहा। ऐसा लग रहा था कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव इस युवा पर भारी पड़ रहा है। लेकिन जो खिलाड़ी बड़े मंच के लिए बने होते हैं, वे असफलताओं से जल्दी सीखते हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ जब उन्हें मौका मिला, तो उन्होंने आलोचकों को अपने बल्ले से करारा जवाब दिया।
क्रीज पर आते ही वैभव का अंदाज बिल्कुल जुदा था। उन्होंने विरोधी गेंदबाजों को सेट होने का जरा भी मौका नहीं दिया और मैदान के हर कोने में बाउंड्रीज की बरसात कर दी। देखते ही देखते उन्होंने सिर्फ 18 गेंदों में अपना पचासा पूरा कर लिया।
इस पारी की सबसे खास बात यह रही कि 15 साल 118 दिन की उम्र में अर्धशतक बनाकर वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। इस मामले में उन्होंने किसी और का नहीं बल्कि खुद 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा है। सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल की उम्र में अपना पहला पचासा जड़ा था।
सचिन ही नहीं, वैभव ने जिब्राल्टर के लुईस ब्रूस और पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी जैसे खिलाड़ियों को भी पछाड़ दिया है।
वैभव की यह पारी महज एक अर्धशतक नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि भारतीय क्रिकेट का आने वाला कल बेहद मजबूत हाथों में है। जिस निडरता और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है, उसने यह साफ कर दिया है कि यह तो बस एक शुरुआत है और आने वाले समय में इस युवा सितारे से कई और बड़े धमाकों की उम्मीद की जा सकती है।