हिटमैन शर्मा जैसी फिटनेस चाहिए; जानिए उनका वर्कआउट और फिट रहने का पूरा सीक्रेट
भारतीय क्रिकेट टीम के धाकड़ बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को मैदान पर घंटों लंबी बल्लेबाजी करते, बड़े-बड़े छक्के लगाते और तेजी से रन चुराते हुए हर किसी ने देखा है। हालांकि, इस विस्फोटक खेल के पीछे केवल नेट्स में घंटों बैटिंग प्रैक्टिस ही नहीं, बल्कि सालों की कड़ी शारीरिक मेहनत और एक अनुशासित फिटनेस रूटीन शामिल है।
अक्सर लोग फिटनेस का मतलब सिर्फ वजन घटाना या जिम में भारी वजन उठाना समझ लेते हैं, लेकिन शरीर को लंबे समय तक चुस्त, ताकतवर और चोटमुक्त बनाए रखने के लिए कार्डियो, स्ट्रेंथ, कोर वर्कआउट और संतुलित डाइट का सही संतुलन बेहद आवश्यक होता है। रोहित शर्मा की दैनिक दिनचर्या इन्हीं तत्वों का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिससे प्रेरणा लेकर कोई भी अपनी फिटनेस को अगले स्तर पर पहुंचा सकता है।
स्टैमिना बढ़ाने के लिए कार्डियो और एंड्योरेंस पर फोकस
मैदान पर पूरे दिन ऊर्जावान बने रहने के लिए कार्डियो एक्सरसाइज रोहित के वर्कआउट का एक बुनियादी हिस्सा रहा है। वह अपने रूटीन में रनिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग (तैरना) को नियमित रूप से शामिल करते हैं। ये एरोबिक एक्सरसाइज दिल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के साथ-साथ फेफड़ों की क्षमता और शरीर के समग्र स्टैमिना को कई गुना बढ़ा देती हैं। अपनी दिनचर्या में वॉक, जॉगिंग या साइकलिंग को जोड़कर कोई भी व्यक्ति आसानी से अपने एंड्योरेंस में सुधार कर सकता है।
मसल्स और पावर के लिए जरूरी है स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
सिर्फ पसीना बहाने या दौड़ने भर से खेल के स्तर की फिटनेस हासिल नहीं होती, इसके लिए मांसपेशियों को मजबूत बनाना अनिवार्य है। रोहित शर्मा के जिम सेशन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का बड़ा महत्व है। वह मुख्य रूप से स्क्वैट्स, डेडलिफ्ट, बेंच प्रेस, फ्रंट स्क्वैट और पुश प्रेस जैसी कंपाउंड एक्सरसाइज पर ध्यान देते हैं। ये एक्सरसाइज शरीर के बड़े मसल ग्रुप्स पर एक साथ काम करती हैं, जिससे बॉडी में ताकत, पावर और मजबूती आती है। किसी भी व्यक्ति को ऐसी भारी एक्सरसाइज हमेशा फिटनेस ट्रेनर की देखरेख में और सही फॉर्म के साथ ही करनी चाहिए।
बेहतर बैलेंस और स्टेबिलिटी के लिए कोर ट्रेनिंग
एक बल्लेबाज के संतुलन और क्रीज पर स्थिरता के लिए कोर मसल्स का मजबूत होना रीढ़ की हड्डी जैसा है। रोहित अपने सेशन में प्लैंक, लेग रेज और पुल-अप्स जैसी एक्सरसाइज शामिल करते हैं। एक मजबूत कोर शरीर के संतुलन को बनाए रखने, पीठ के निचले हिस्से को सुरक्षित रखने और किसी भी दिशा में तेजी से मुड़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। शुरुआत में हमेशा अपनी क्षमता और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही कोर वर्कआउट करना चाहिए।
मैदान पर तेजी के लिए एजिलिटी ड्रिल्स
क्रिकेट जैसे आधुनिक खेल में पलक झपकते ही गेंद पर झपटना, डाइव लगाना और दिशा बदलना पड़ता है। इसके लिए रोहित की ट्रेनिंग में एजिलिटी ड्रिल्स को खास जगह दी जाती है। कोन ड्रिल और लैडर ड्रिल जैसी एक्सरसाइज पैरों की रफ्तार (Footwork Speed), बॉडी रिफ्लेक्स और शरीर के मूवमेंट को बेहद फुर्तीला बनाती हैं। फिटनेस में बोरियत से बचने के लिए रोहित हर दिन एक जैसा वर्कआउट करने के बजाय कभी कार्डियो, कभी स्ट्रेंथ तो कभी एजिलिटी पर बारी-बारी से ध्यान केंद्रित करते हैं।
हाई-प्रोटीन डाइट और पसंदीदा वड़ापाव से दूरी
कसरत के साथ-साथ प्लेट में क्या जा रहा है, इसका भी पूरा ख्याल रखना पड़ता है। रोहित की नियमित डाइट में ओट्स, ब्राउन राइस, हरी सब्जियां, लीन चिकन, मछली, पनीर और सूखे मेवे शामिल रहते हैं। यह डाइट शरीर को जरूरी प्रोटीन, कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और हेल्दी फैट्स की संतुलित मात्रा प्रदान करती है। मजेदार बात यह है कि मुंबई के जायके वड़ापाव के बेहद शौकीन होने के बावजूद रोहित ने अपनी ट्रेनिंग और फिटनेस लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपनी इस पसंदीदा चीज से पूरी तरह दूरी बना ली थी। उनके ट्रेनर अभिषेक नायर ने 2025 में उनकी इस कड़ी ट्रेनिंग और खानपान के अनुशासन का खुलासा किया था, जिससे यह साबित होता है कि फिटनेस के लिए जुबान के स्वाद पर नियंत्रण रखना कितना आवश्यक है।
मसल्स रिकवरी और पर्याप्त आराम है सबसे अहम
कड़े वर्कआउट के बाद शरीर को दोबारा ऊर्जावान बनाने के लिए रिकवरी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। रोहित अपनी दिनचर्या में पर्याप्त नींद, भरपूर पानी का सेवन (हाइड्रेशन), स्ट्रेचिंग और मोबिलिटी एक्सरसाइज को उतनी ही अहमियत देते हैं जितनी ट्रेनिंग को। शरीर को लगातार थकाते रहने के बजाय वर्कआउट और रेस्ट के बीच का सही संतुलन ही लंबी अवधि में चोटों से बचाता है। रोहित के रूटीन से यह साफ सीख मिलती है कि किसी की पूरी नकल करने के बजाय अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे वर्कआउट का स्तर बढ़ाना ही टिकाऊ फिटनेस का असली मंत्र है।