बामणी गांव पहुंचे सीएम धामी: माताओं और बहनों के साथ किया पारंपरिक नृत्य
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने सरल स्वभाव और जन-कल्याणकारी फैसलों के साथ-साथ अपनी लोक संस्कृति के प्रति गहरे जुड़ाव के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री धामी अपने तय दौरे के तहत प्रसिद्ध बामणी गांव पहुंचे, जहाँ पहुँचते ही उनका स्वागत किसी वीआईपी प्रोटोकॉल की तरह नहीं, बल्कि एक अपने ही परिवार के सदस्य की तरह किया गया। गांव की पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाओं और स्थानीय निवासियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ सीएम का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान एक बेहद खूबसूरत और मनमोहक दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद को रोक नहीं पाए और पारंपरिक लोकनृत्य 'छाछनी नृत्य' में महिलाओं के साथ पूरी ऊर्जा के साथ थिरकने लगे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पारंपरिक नृत्य करते देख वहां मौजूद हर शख्स का चेहरा खिल उठा और पूरा गांव तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह पल न केवल बामणी गांव के इतिहास में बल्कि पूरे क्षेत्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में एक यादगार क्षण बन गया है, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है।
पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और गांव की महिलाओं का उत्साहपूर्ण स्वागत
बामणी गांव की फिजा इन दिनों एक अलग ही उत्सव के रंग में रंगी हुई थी। जैसे ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का काफिला गांव की सीमा में दाखिल हुआ, वैसे ही दूर-दूर से इकट्ठा हुई मातृशक्ति (महिलाओं) ने पारंपरिक लोकगीतों और जयकारों के साथ उनका अभिवादन किया। उत्तराखंड की पहाड़ी संस्कृति में मेहमानों का स्वागत जिस आत्मीयता और उल्लास के साथ किया जाता है, उसकी एक अद्भुत मिसाल बामणी गांव में देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक पिछौड़ा और रंग-बिरंगे परिधान पहन रखे थे। ढोल, दमाऊ और हुरका की थाप पर पहाड़ी गीतों की गूंज ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से ऊर्जावान बना दिया। मुख्यमंत्री धामी ने भी बिना किसी वीआईपी झिझक के आगे बढ़कर महिलाओं का अभिवादन स्वीकार किया और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर पहाड़ी संस्कृति का मान बढ़ाया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठने के बावजूद मुख्यमंत्री अपनी जड़ों और अपनी माटी की संस्कृति से कितने गहराई से जुड़े हुए हैं।
जब सीएम धामी ने महिलाओं के साथ किया प्रसिद्ध 'छाछनी नृत्य'
इस पूरे दौरे का सबसे आकर्षक और भावुक पल वह था जब मुख्यमंत्री धामी ने गांव की महिलाओं और स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक 'छाछनी नृत्य' (Chhachhani Dance) में हिस्सा लिया। उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में यह नृत्य आपसी मेल-मिलाप, खुशी और सांस्कृतिक उल्लास का प्रतीक माना जाता है। जब महिलाओं ने मुख्यमंत्री को अपने साथ नाचने का निमंत्रण दिया, तो मुख्यमंत्री ने बिना एक पल गंवाए उनके साथ ताल से ताल मिला दी। उनके चेहरे पर साफ झलकती खुशी और नृत्य के दौरान दिखाए गए सहज अंदाज ने यह साबित कर दिया कि वे राजनीति से परे अपनी संस्कृति के सच्चे संवाहक हैं। वहां मौजूद बुजुर्गों और युवाओं ने मुख्यमंत्री के इस सादगी भरे रूप को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय जनता का मनोबल बढ़ता है, बल्कि राज्य की लोक कलाओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिलती है।
विकास कार्यों का जायजा और स्थानीय जनता से सीधा संवाद
सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक नृत्य में शामिल होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बामणी गांव के दौरे के दौरान स्थानीय विकास कार्यों की जमीनी हकीकत का भी जायजा लिया। उन्होंने गांव के प्रमुख लोगों, युवाओं और महिलाओं से चौपाल पर बैठकर सीधी बातचीत की। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं, क्षेत्र में सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर पात्र व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचना चाहिए। ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी कई बातें रखीं, जिस पर सीएम धामी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना और उनका त्वरित समाधान करना ही मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है, जो इस दौरे में एक बार फिर स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
देवभूमि की संस्कृति और जन-संवाद का अनूठा संगम
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जहां की भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं, वहां के निवासियों की संस्कृति और उनके रीति-रिवाज ही उनकी असली पहचान हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बामणी गांव का यह दौरा इस बात का संदेश देता है कि सत्ता और कुर्सी से ऊपर उठकर जनसेवा और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना ही असली नेतृत्व है। जब एक राज्य का मुखिया आम जनता के बीच पहुंचकर उनके सुख-दुख में शामिल होता है और उनके साथ लोकनृत्य करता है, तो इससे जनता और सरकार के बीच का फासला पूरी तरह मिट जाता है। इस दौरे ने न केवल बामणी गांव के निवासियों के दिलों में एक विशेष जगह बनाई है, बल्कि पूरे उत्तराखंड में यह संदेश गया है कि राज्य सरकार हर गांव और हर नागरिक के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऐसे जीवंत और प्रेरणादायक पल यह साबित करते हैं कि परंपराओं का सम्मान करते हुए ही एक सशक्त और आधुनिक समाज का निर्माण किया जा सकता है।