क्या 2027 में पाकिस्तान जाएंगे भारतीय खिलाड़ी? विदेश मंत्रालय ने साफ की भारत की खेल नीति

क्या 2027 में पाकिस्तान जाएंगे भारतीय खिलाड़ी? विदेश मंत्रालय ने साफ की भारत की खेल नीति

अंतरराष्ट्रीय खेल जगत और कूटनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसा सवाल सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है जिस पर हर खेलप्रेमी की निगाहें टिकी हुई हैं। आगामी वर्ष यानी 2027 में दक्षिण एशियाई खेल (South Asian Games - SAF Games 2027) का आयोजन पड़ोसी देश पाकिस्तान की मेजबानी में होना तय हुआ है। पाकिस्तान ओलंपिक संघ की ओर से यह दावा किया गया है कि भारत ने क्षेत्रीय ओलंपिक स्तर पर इस बहुप्रतीक्षित प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति दे दी है। हालांकि, जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, भारत के राजनीतिक और खेल हलकों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि क्या भारतीय एथलीट और खिलाड़ी अगले साल पाकिस्तान की यात्रा करेंगे या नहीं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों और द्विपक्षीय सीरीज के ठप होने के कारण किसी भी मल्टी-नेशन टूर्नामेंट में भारतीय दल की भागीदारी हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। इस बीच, देश की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि आखिर इस मामले में भारत सरकार और आधिकारिक एजेंसियों का रुख क्या रहने वाला है।

विदेश मंत्रालय (MEA) का आधिकारिक बयान: खेल नीति और बहुपक्षीय आयोजनों पर स्थिति स्पष्ट

इस गरमागरम बहस के बीच भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान साफ शब्दों में कहा कि एसएएफ गेम्स 2027 में भारत की भागीदारी का कोई भी अंतिम निर्णय पूरी तरह से युवा मामलों और खेल मंत्रालय द्वारा हाल ही में घोषित की गई राष्ट्रीय खेल नीति (Sports Policy) के दायरे में ही लिया जाएगा। सरकार की इस स्पष्ट नीति के अनुसार, भारत किसी भी ऐसे द्विपक्षीय टूर्नामेंट के लिए अपनी टीमों को पाकिस्तान नहीं भेजेगा जहां केवल दोनों देश आमने-सामने हों, और न ही पाकिस्तानी टीमों को द्विपक्षीय सीरीज के लिए भारत आने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, खेल मंत्रालय के नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय (Multilateral) प्रतियोगिताओं—जिनमें कई देश एक साथ हिस्सा लेते हैं—के मामले में नियम पूरी तरह से अलग होते हैं। ऐसे आयोजनों के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों के निर्देशों और अपने खिलाड़ियों के व्यापक हितों को सर्वोपरि रखता है।

खेल मंत्रालय की नीति और बहुपक्षीय टूर्नामेंट्स को लेकर सरकार का दो टूक रुख

भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा तय की गई गाइडलाइंस के मुताबिक, देश के एथलीट उन अंतरराष्ट्रीय या क्षेत्रीय बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में भाग ले सकते हैं जो किसी अन्य देश में आयोजित हो रहे हों और जिसमें पाकिस्तान या अन्य देशों की टीमें भी शामिल हों। यही वजह है कि पाकिस्तान में होने वाले दक्षिण एशियाई खेलों को लेकर ओलंपिक संघ के स्तर पर शुरुआती सहमती की चर्चाएं सामने आई हैं, क्योंकि यह कोई द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं बल्कि एक बड़ा क्षेत्रीय बहु-खेल महाकुंभ है। हालांकि, पाकिस्तान ओलंपिक संघ के दावों के बावजूद भारत सरकार या भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की तरफ से खिलाड़ियों के सीमा पार जाने को लेकर अभी तक कोई अंतिम और औपचारिक हरी झंडी नहीं दी गई है। खेल प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जनवरी 2027 तक ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि भारत अपने खिलाड़ियों का दल पड़ोसी देश में भेजने के लिए आधिकारिक रूप से अंतिम अनुमति देता है या नहीं।

पाकिस्तान में होने वाले इन खेलों की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां

दक्षिण एशियाई खेल परिषद (SAOC) के हालिया कार्यक्रमों के अनुसार, आगामी एसएएफ गेम्स का आयोजन अगले साल अप्रैल के महीने में पाकिस्तान के तीन प्रमुख शहरों—इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर—में किया जाना तय हुआ है। पाकिस्तान सरकार और वहां की एजेंसियां इस आयोजन को सफल बनाने के लिए एथलीटों की सुरक्षा, आवास, परिवहन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुनियादी ढांचे को तैयार करने में जुटी हुई हैं। पाकिस्तान के उच्च स्तर पर इन खेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है ताकि बाहर से आने वाले सभी मेहमान देशों के खिलाड़ियों और अधिकारियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। भारत इस क्षेत्र का सबसे सफल खेल राष्ट्र रहा है और इतिहास में उसने इन खेलों में सबसे ज्यादा पदक अपने नाम किए हैं, यही कारण है कि खेल प्रेमियों और क्षेत्रीय ओलंपिक संघों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारतीय दल इस बार पड़ोसी देश की यात्रा करेगा या नहीं।

भारतीय खेल प्रेमियों और एथलीटों के भविष्य पर इस नीतिगत फैसले का प्रभाव

विदेश मंत्रालय और खेल मंत्रालय के इस स्पष्ट रुख से यह संकेत मिल गया है कि भारत सरकार कूटनीतिक मोर्चे पर भले ही बेहद सख्त और स्पष्ट नीतियां अपनाती हो, लेकिन खेल के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय नियमों और एथलीटों के करियर को नुकसान न पहुंचे, इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है। यदि खेल और विदेश मंत्रालय की तरफ से औपचारिक मंजूरी मिलती है, तो भारतीय एथलीटों के लिए एक बार फिर क्षेत्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता में अपना दम दिखाने का रास्ता साफ हो जाएगा। फिलहाल, खेल संघों और संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है, और आने वाले हफ्तों में यह तय हो जाएगा कि भारत का खेल दल पाकिस्तान में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ का हिस्सा बनेगा या नहीं।